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महाकाल की श्रावण की पहली सवारी में परंपरा अनुसार नौ भजन मंडलियां शामिल होंगी

उज्जैन। श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की पहली सवारी निकलेगी। जिला व मंदिर प्रशासन द्वारा सवारी में भीड़ नियंत्रण के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। इस बार परंपरा अनुसार निकलने वाली नौ भजन मंडलियों को सवारी में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। इन्हें भी सदस्य संख्या समिति रखना होगी। किसी नए मंडल को अनुमति नहीं दी जाएगी।

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से शाम चार बजे शाही ठाठ बाट के साथ भगवान महाकाल की सवारी शुरू होगी। राजाधिराज भगवान महाकाल चांदी की पालकी में मनमहेश रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।

मंदिर से शुरू होकर सवारी प्रमुख मार्गों से होकर शाम पांच बजे पालकी मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा जल से भगवान महाकाल के अभिषेक-पूजन के बाद सवारी पुन: महाकाल मंदिर पहुंचेगी, जहां भगवान महाकाल की संध्या आरती होगी।

कड़ी सुरक्षा में पालकी, दूर से दर्शन होंगे

सवारी में पालकी की कड़ी सुरक्षा रहेगी। सुरक्षाकर्मी रस्से के डबल घेरे में पालकी को सुरक्षित रहेंगे। इस घेरे में केवल कहार, पुजारी,पुरोहित व ड्यूटी पर तैना अधिकारी रहेंगे। किसी भी व्यक्ति को इसमें प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी को दूर से भगवान महाकाल के दर्शन होंगे।

खंबों पर शीट लगाई, डीपी खुली पड़ी

विद्युत वितरण कंपनी द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सवारी मार्ग पर लगे समस्त विद्युत पोल पर प्लास्टिक की शीट लगाई गई है। लेकिन सवारी मार्ग पर अनेक डीपी खुली पड़ी है। इनका सुधार कार्य नहीं कराया गया है। अधिक भीड़ अथवा बारिश होने पर यह दुर्घटना का कारण बन सकती है।

शाही सवारी के मार्ग को विस्तारित करने की मांग

कांग्रेस नेता विवेक यादव ने कलेक्टर पुरुषोत्तम कुमार को पत्र लिखकर भगवान महाकाल की शाही सवारी के मार्ग को विस्तृत करने की मांग की है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में भी मार्ग विस्तारित होता रहा है। यादव ने कहा कि शाही सवारी शिप्रा तट पर पूजन के बाद ढाबा रोड, तेलीवाड़ा, कंठाल, सती गेट, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार से गुजरते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंचती है। भक्तों की सुविधा के लिए मार्ग विस्तार कर सवारी को तेलीवाड़ा चौराहे से गाड़ी अड्डा, कोयला फाटक, निजात पूरा होकर कंठल चौराहा से सती गेट होकर पुनःउसी मार्ग से महाकाल तक ले जाया जा सकता है।

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