ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

संस्कृति की झलक दिखाएगा हिंदी भवन

ग्वालियर। हिंदी साहित्य भवन में शोध के लिए अलग अलग कक्ष बनने के साथ इस बात का ध्यान रखा जा रहा है भवन अपनी भारतीय संस्कृति को समेटे हुए दिखाई दे । भवन में वह सबकुछ तैयार किया जा रहा है जो आपको पुरातन संस्कृति के दर्शन कराएगा। इसलिए घने वन,कुटिया , ओपन क्लास रूम सहित उसमें आधुनिकता के साथ गुरुकुल की भी झलक दिखाई देगी।

भारत रत्न श्रीअटल बिहारी वाजपेयी स्मृति हिंदी साहित्य भवन का अब जो स्वरूप तैयार किया जा रहा है, वह प्रदेश में हिंदी सहित अन्य भाषाओं,बोली को समझने और शोध के लिए भी होगा। अटलजी के हिंदी को लेकर योगदान का महत्व भी बताया जाएगा। हिंदी पर शोध का संस्थान आकर्षक रूप से तैयार होगा। इसका डिजायन फायनल कर ले-आउट को तैयार किया जा चुका पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी ने कहा था-क्या मेरे मरने के बाद बनेगा हिंदी भवन विदेश मंत्री रहने के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिंदी में भाषण देकर राष्ट्रभाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया था। हिंदी के प्रति उनके प्रेम को उनके इस उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं। उनका सपना था ग्वालियर में हिंदी भवन का निर्माण हो। यहां ग्वालियर आगमन के दौरान हिंदी साहित्य भवन के लिए उन्होंने जीते-जी काफी प्रयास किए। ग्वालियर के अपने साहित्यकार साथियों से उन्होंने यहां तक कहा कि क्या मेरे मरने के बाद बनेगा हिंदी भवन। उनके निधन के 5 साल बाद अब भवन आकार लेने लगा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.