ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

खुद को वोटबैंक समझे जाने से नाखुश है मालवांचल का आदिवासी समुदाय

धार। मध्य प्रदेश के मालवांचल का आदिवासी समाज खुद को वोटबैंक समझे जाने से नाखुश है। चुनाव के समय जिस तरह से सुध ली जाती है और बाद में भुला दिया जाता है, इस बात को लेकर नाखुशी ज्यादा है। अंचल के आदिवासी बहुल धार जिले में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग गांवों में सुविधा न पहुंच पाने की बात कहते हैं। यही बात यहां मुद्दा बनने लगी है। लोगों का कहना है कि उन्हें आवास तक नहीं मिल पाए। पेसा कानून कागजों से बाहर नहीं निकल पाया।

अब बदल रही है तस्‍वीर

अब तक के चुनाव में होता रहा है कि केवल व्यक्तिगत संपर्क और अपनी वादों को लेकर ही चुनाव होते रहे हैं। अब धीरे-धीरे तस्वीर बदल रही है। यह वर्ग भी जागरूक हो रहा है। विकास की बातें होने लगी हैं। चुनावी दौर में अपने अधिकार के प्रति इन लोगों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। वे जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखने की स्थिति में आ गए हैं।

ग्रामीणों के अधिकार की जानकारी नहीं

अधिकांश सरपंचों एवं आदिवासी अंचल के ग्रामीणों को अधिकार के बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन जागरूक ग्रामीण उन्हें घेरने लगे हैं। उनके जरिए कांग्रेस और भाजपा के प्रमुख चेहरों से शिकवा शिकायत का क्रम तेज हो गया है। उनका कहना है कि वे अब भीड़ तंत्र नहीं बनने वाले। आवास सुविधा से लेकर कई बुनियादी सुविधाएं अभी भी इन लोगों से दूर हैं। ऐसे में यह सब कमियां इस बार चुनावी मुद्दे के तौर पर सामने आ रही हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.