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जीवाजी विश्वविद्यालय में दस्तावेज लेकर पहुंचा शिव शक्ति कॉलेज का संचालक, जांच के बाद स्‍पष्‍ट होगा मामला

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त मुरैना जिले के शिवशक्ति कॉलेज का संचालक अपने कॉलेज के दस्तावेज लेकर जीवाजी विश्वविद्यालय जा पहुंचा विश्वविद्यालय द्वारा दस्तावेज सहित उसे तलब किया गया था इसके बाद बीते शुक्रवार को कॉलेज संचालक अपने कॉलेज की दस्तावेज लेकर जेयू पहुंच गया अब दस्तावेजों की जांच होगी, इसके बाद तय किया जाएगा कि मामला दरअसल में है क्या।

बता दें कि जेयू से जांच दल कॉलेज की जांच करने गया था। जांच अधिकारियों का कहना है कि जांच दल जब मौके पर गया तो वहां मौके पर कोई कॉलेज नहीं मिला । जिसकी जांच रिपोर्ट दल ने जेयू में सबमिट कर दी है, जिसके बाद जेयू ने कॉलेज के दस्तावेज मंगवाए ।

उल्लेखनीय है की इस मामले का शिकायतकर्ता और उस कॉलेज का कथित प्राचार्य अरुण शर्मा पिछले लंबे समय से जीवाजी यूनिवर्सिटी में एक मानसेवी शिक्षक के तौर पर काम करते थे। पिछली 10 अगस्त को इन्हे जीवाजी विश्वविद्यालय ने नौकरी से निकाल दिया है। इसके पीछे का कारण ये रहा की हाल ही में झुंडपुरा के शिव शक्ति कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर अरुण का काम करना बताया जा रहा था लेकिन अरुण इस बात से इंकार कर रहे है। इसको लेकर उन्होंने जेयू को कई बार शिकायत भी दी है। एसपी से मुलाकात कर अपनी शिकायत भी दर्ज कराई है। लेकिन इस मुद्दे को इसके अलावा निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।

शिकायत करने वाले से ही कागज मांगे

अरुण शर्मा का कहना है कि वह पिछले लंबे समय से जेयू से इस मामले की शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है लेकिन जेयू ने बजाय मामले की जांच कराने के उस प्राचार्य से ही दस्तावेज मांग लिए। जिस पर नाराजगी जताते हुए अरुण शर्मा ने एसपी से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष कार्यवाही करने की मांग की है।

आप वो अरुण नहीं है

जब जेयू ने इस मामले को लेकर कथित प्राचार्य से बात की और प्राचार्य अरुण शर्मा ने उनसे इस मामले को निष्पक्ष तौर पर जांचने के लिए कहा तो उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कॉलेज से जानकारी मांगी है और कॉलेज वालों का कहना है कि जिस डॉक्टर अरुण शर्मा को उन्होंने प्राचार्य बनाया है वह आप नहीं है।

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