विवाद जैसा भी हो, वह विवाद से नही संवाद से होता है समाप्त : अरविंद कुमार चक्रवर्ती
सासाराम। हमारे देश में कुर्सी के लिए संघर्ष चल रहा है लेकिन उसमें शासक ही शासक से अपने स्वार्थ के लिए चाल चल रहा है परंतु उसकी साजिस का शिकार हमलोग होते हैं। वो सीधे वार नही करता बल्की सीधी साधी जनता को अपना मोहरा बनाता है। हालीया कार्नाटक मामला को देखिये अबोध बच्चों को कैसे मोहरा बनाया गया, एक तरफ मुस्लिम कट्टरपंथी ने मुस्कान खान को तैयार किया तो वही दूसरे तरफ हिन्दू आतंकी सैकडो बच्चों को भगवा गामच्छा देकर बैमनस्य और आशांति ही नहीं फैलाये बल्की भगवा झंडा भी फाहराये और फिर प्रमाणआपके सामने है कि हर्ष को शहादत देना पडा तो वही कुछ मुस्लिम बच्चों को आज जेल भी जाना पडा। खैर इससे उनका क्या बिगडा जिनके बच्चे अच्छे स्कूल,इंस्टीट्यूट में पढते हैं इससे वैसे नेताओं को खूब लाभ होगा जो हिन्दू मुस्लिम करके वोट पोलराइज करके सत्ता में और विपक्ष में आयेंगे। आम जनता के पास कुछ नहीं होगा सिर्फ़ आँखों में आंसू के ईलावा। मुझे इस बात की नाराजगी है कि हम सब मानवता को खोते जा रहे हैं। धर्म, मजहब के नाम पर पंडित, मुल्ला की साजीस का शिकार हो रहे हैं और समाज को विषाक्त कर रहे हैं। एक तरफ से मुस्लिम कट्टरपंथियो का ये स्लोगन देना कि “पहले हीजाब तब किताब” सीधे तौर पर महिलाओं को धार्मिक गुलाम बना रहा है और उसे पुरूष से कमतर आंकने की साजिस है और माहिलाओं को मोहरा बना कर राजनितिक रोटियां सेकने का काम किया जा रहा है। वही हिन्दू युवाओं को धर्म रक्षा और हिन्दुत्वा रक्षा के नाम पर बर्गला कर उनके भविष्य को बर्बाद करने की साजिस हो रही है, आज सासाराम में उक्त बातें बताते हुए अखिल भारतीय अम्बेदकर कल्याण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार चक्रवर्ती ने कही साथ में यह भी कहा कि जिन बच्चों को अच्छी और मुफ्त शिक्षा इलनी चाहिए थी, रोजगार के लिए आंदोलन करना चाहिए था वह लोग आज साजिस के शिकार होकर धर्म के लिए अंजाने में आंदोलन के नाम पर देशद्रोह का कार्य कर रहे हैं, और फिर इसका प्रभाव आने वाले समय में हमारे बच्चों पर खराब पडेगा, बच्चे ही हमारे भविष्य हैं, और क्या उन्हे ही हम सुरक्षित नही रख सकते ? क्या कल को सुरक्षित करना हमारी ज़िम्मेवारी नही है ? दुनियां बुद्ध से सुरक्षित रहेगा न कि युद्ध से, इसलिय समता मूलक समाज के निर्माण हेतु हमें सत्तासीन शासकों की साजीशो को समझना होगा और फिर बेहतर समाज के निर्माण में अपना अहम योगदान देना होगा। हमारे समाज के लोग जब बेहतर होंगे तभी देश भी बेहतर होगा।