रूस का कीव पर कब्जा तभी संभव है, जब वो इसे पूरी तरह तबाह कर देगा : यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की
कीव । रूसके हमलों से बियाबन में तब्दील हो रहे यूक्रेन में हालात काफी भयावह हो गए है। रूसी सेना अब कीव को घेरने की तैयारी कर रही है। वहीं ओडेसा में सुबह से गोलीबारी जारी है। उधर कीव में भी रूसी सैनिकों ने बमबारी की। उधर, अमेरिका ने रूस की घेराबंदी के लिए 12 हजार फौजी भेज दिए हैं। वहीं यूक्रेन के ल्यूटस्क में रूसी सेना ने गोलीबारी की। इसमें 4 सैनिकों की मौत हो गई। जबकि 6 लोग घायल हो गए।
अमेरिका करेगा यूक्रेन की मदद-
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच अमेरिका ने एक बार बड़े संकेत दिए हैं। कहा गया है कि यूक्रेन की मदद करने के लिए अमेरिका कुछ बड़े कूटनीतिक कदम उठा सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर रूस हजारों सैनिक लेकर आ जाएगा, अगर उसके हजारों टैंक दाखिल हो जाएंगे, तो कीव पर वो अपना कब्जा कर सकता है। लेकिन जेलेंस्की ने जोर देकर कहा है कि रूस का कीव पर कब्जा तभी संभव है, जब वो इसे तबाह कर देगा।
वार्ता को तैयार जेलेंस्की-
रूसी मीडिया ने दावा किया है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की हर मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार हैं। पहले ही तीन दौर की बातचीत हो चुकी है, ऐसे में रूस के इस दावे को सकारात्मक रूप में लिया जा रहा है। यूक्रेन संग जारी युद्ध के बीच अब सोनी पिक्चरर्स ने भी रूस में अपना कारोबार समेट लिया है। इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियां रूस में अपना कारोबार बंद कर चुकी हैं।
जेलेंस्की का रूस को लेकर बड़ा दावा-
यूक्रेन राष्ट्रपति ने कहा है कि इस युद्ध की वजह से रूस को कई दशकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक इस युद्ध ने रूस को कई साल पीछे कर दिया है। यूक्रेन संग जारी युद्ध के बीच कई देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस बीच रूस की तरफ से नासा और दूसरे स्पेस संस्थानों को चेतावनी दी गई है। बयान में कहा गया है कि अमेरिका, कनाडा और यूरोप के दूसरे देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को भी खतरा पड़ सकता है। ऐसे में तमाम पाबंदियों को तुरंत हटाया जाए।
यूक्रेन सरकार ने दावा किया है कि रूसी सेना ने मारियूपोल में एक मस्जिद पर हमला किया है। उसकी तरफ से भारी गोलीबारी की गई है। जिस समय ये हमला हुआ तब वहां पर 80 लोगों ने शरण ले रखी थी। उसमें ज्यादातर तुर्की के नागरिक थे जिन्होंने खुद को बचाने के लिए मस्जिद का सहारा लिया था।
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