कुश्ती में भीम भी नहीं हरा पाए थे इस राजा को, फिर श्रीकृष्ण के इशारे पर दी इतनी भयानक मौत
उज्जैन. जरासंध मगध देश का राजा और कंस (Mahabharata Kansa) का ससुर था। कंस को मारने के कारण वो श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता था। उसने मथुरा पर कई बार आक्रमण भी किया और जीत नहीं पाया।
श्रीकृष्ण भी उसे जीवनदान देकर छोड़ देते थे। आखिरकार अपनी प्रजा की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण को मथुरा छोड़कर द्वारिका में जाना पड़ा। जरासंध के जन्म और मृत्यु की कहानी भी बहुत ही रोचक है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आगे जानिए कौन-था जरासंध और उससे जुड़ी खास बातें.
2 हिस्सों में हुआ था जरासंध का जन्म
– महाभारत के अनुसार, मगधदेश में बृहद्रथ नाम के राजा थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। एक जिन उनकी सेवा से प्रसन्न होकर महात्मा चण्डकौशिक ने उन्हें एक फल दिया और कहा कि “इसे अपनी पत्नी को खिला देना।” राजा की दो पत्नियां थीं। राजा ने फल को दो हिस्सों में काटकर अपनी दोनों पत्नियों को खिला दिया।
– समय आने पर दोनों रानियों के गर्भ से बालक के शरीर का एक-एक टुकड़ा पैदा हुआ। रानियों ने घबराकर दोनों जीवित टुकड़ों को बाहर फेंक दिया। उसी समय वहां से एक राक्षसी गुजरी। उसका नाम जरा था। उसने अपनी माया से उन दोनों टुकड़ों को जोड़ दिया। एक शरीर होते ही वह शिशु जोर-जोर से रोने लगा।
– बालक की रोने की आवाज सुनकर दोनों रानियां और राजा बाहर आए। उन्होंने उस राक्षसी से उसका परिचय पूछा। राक्षसी ने सारी बात उन्हें सच-सच बता दी। राजा ने उस बालक का नाम जरासंध रख दिया क्योंकि उसे जरा नाम की राक्षसी ने संधित (जोड़ा) किया था।
राजाओं की बलि देकर चक्रवर्ती सम्राट बनना चाहता था जरासंध
– महाभारत के अनुसार, जरासंध भगवान शंकर का परम भक्त था। उसने अपने पराक्रम से 86 राजाओं को बंदी बना लिया था। बंदी राजाओं को उसने पहाड़ी किले में कैद कर लिया था।
– जरासंध 100 को बंदी बनाकर उनकी बलि देना चाहता था, जिससे कि वह चक्रवर्ती सम्राट बन सके। यह बात भगवान श्रीकृष्ण को पता चली तो उन्होंने जरासंध को मारने के लिए एक योजना बनाई।
जरासंध ने भीम के साथ 13 दिन तक किया था युद्ध
– जरासंध का युद्ध करने के उद्देश्य से एक बार श्रीकृष्ण, भीम व अर्जुन ब्राह्मण का वेष बनाकर जरासंध के पास गए और उसे कुश्ती के लिए ललकारा। जरासंध समझ गया कि ये ब्राह्मण नहीं है। जरासंध के कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना वास्तविक परिचय दिया। जरासंध ने भीम से कुश्ती लड़ने का निश्चय किया।
– जरासंध और भीम का युद्ध 13 दिन तक लगातार चलता रहा। चौदहवे दिन भीम ने श्रीकृष्ण का इशारा समझ कर जरासंध के शरीर के दो टुकड़े कर उसका वध कर दिया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने जरासंध के पुत्र सहदेव को मगध का राजा बना दिया।
– श्रीकृष्ण ने जरासंध की कैद से सभी राजाओं को आजाद कर दिया और कहा कि धर्मराज युधिष्ठिर चक्रवर्ती पद प्राप्त करने के लिए राजसूय यज्ञ करना चाहते हैं। आप लोग उनकी सहायता कीजिए। श्रीकृष्ण का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
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