एटीआर के विस्थापित गांव जल्दा में गौर के कुनबे होते है इक_ा
बिलासपुर । वन्यजीवों को उनकी जमीन वापस मिल गई है और वह उसे अपने मुताबिक इस्तेमाल करने लगें है। कोई साल 10 साल हुये अचानकमार टाइगर रिजर्व में पांच गांव का विस्थापन हुआ था उसमें एक जल्दा था। जाहिर है जब पार्क के शेष 19 गांव की जमीन इन जीवों को वापस मिलेगी तो यह जंगल वन्य जीवों का अनुपम उद्यान प्रकृति के आंगन में होगा ।
जल्दा के खेत मैदान और तालाब सब पर हर सन्ध्या इन दिनों इंडियन गौर याने बाइसन पानी पीने और घास चराई करने छोटे बड़े दलों में पहुंच रहे है।जिनकी संख्या सौ को पार कर जाती है यह दृश्य पिछले दिनों मोबाइल सेमसन ्र50ह्य से लिया गया है। यहां बांध सी जो बांध जिसआकृति बना दी गईं उस वजह मैं इस स्थली को अचानकमार का सोंढूर कहता हूं। ऐसा कान्हा नेशनल पार्क में है। इस पर भी बाइसन खड़े मिलते हैं।
कुल मिलाकर यह मैदान,तालाब, सड़क पर काफी संख्या थी। गर्मी बढ़ रही है और ऊपरी पहाड़ी इलाके में पानी कम हो रहा है। यह साल याने सरई पेड़ों का जंगल है और इन दिनों पूरे इलाके में पतझड़ से पत्ते गिर के बिछे हुए हैं।यह बारिश में जंगल की जैविक खाद बनेंगे। पर अभी इनकी वजह घास की कमी है और आग का खतरा।
जल्दा गांव के विस्थापन बाद यहां प्राकृतिक हरी घास के मैदान और पानी है। इसलिये यह मैदान बाइसन और वन्यजीवों की पसंदीदा स्थली बन गयी हैं।यहां इंडियन गौर यहां दल बल से संध्या पहुंचते हैं। यह अनोखा दृश्य सन्ध्या जिप्सी सफ़ारी में सैलानियों के लिए पैसा वसूल शो माना जा सकता है। बाइसन आमतौर परशांति प्रिय विशालकाय वन्यजीव है, इसे धैर्य से कुछ दूरी से देखे,वो आक्रमक नहीं होते। यहां तेंदुआ, चीतल,मोर, जंगली सूअर,मुर्गा,सम्भर जो दिखते हैं उन्हें सफरी का बोनस समझे।
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