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अमृत महोत्सव के अवसर पर किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी कार्यक्रम का किया गया आयोजन।

पिपरा कोठी। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान पिपरा कोठी के सभागार में बृहस्पतिवार को किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक डॉ एसके पूर्वे ने की जबकि मुख्य अतिथि नवोदय विद्यालय के प्राचार्य एस थयाग राज मौजूद थे ।इस अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए प्रधान वैज्ञानिक डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा भारत सरकार का यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है इस कार्यक्रम के तहत अनाज की जो पुरानी प्रजातियां है उसे विकसित कर अपने जीवन केभोजन में शामिल करना तथा इसकी उपज बढ़ाना है पुराने अन की प्रजातियां धीरे धीरे लुप्त होती जा रही है जबकि उसके उत्पादन में किसी प्रकार का खर्च नहीं है ना विशेष पानी की आवश्यकता है और ना विशेष खाद की अनाज को अगर दो भागों में बांटा जाए तो एक मोटा अनाज ज्वार मडुआ मक्का बजारा इत्यादि आते हैं जिसके खेती में भी विशेष परेशानी नहीं है मोटे अनाज का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है वही प्रधान वैज्ञानिक डॉ एसके पूर्वे ने कहा प्राचीन काल में मोटे फसलों की खेती का प्रचलन अच्छा था और यह अनाज लोगों को आसानी से मिल भी जाता था हरित क्रांति के पहले आमतौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों में भी चावल और गेहूं का इस्तेमाल सिर्फ पर्व त्यौहार या विशेष अवसर पर ही किया जाता था परंतु एक समय ऐसा आया जो हमारे देश में अनाज की कमी होने लगी तब इस कमी को दूर करने हेतु हमारे वैज्ञानिकों एवं किसानों के प्रयासों से गेहूं व चावल का भरपूर उत्पादन हुआ और हम हमारी जरूरत से ज्यादा अनाज पैदा करने लगे जिससे कुछ समय के लिए मोटे अनाज की फसलों की ओर से हमारा ध्यान कम हो गया परिणाम स्वरूप इस क्षेत्र में गिरावट आई परंतु उत्पादकता बड़ी वास्तविकता यह है कि नई पीढ़ी को मोटे अनाजों के नामों की जानकारी भी नहीं है जबकि मोटा आनाज अत्यंत पौष्टिक फसलें हैं मौके पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ अनूराग राय यादव‌ वैज्ञानिक डॉ एसके श्यामल इंजीनियर विकास पराड़कर रवि कुमार डॉ पीके भारती डा श्रेया निवेश सहित बहुत सारे किसान मौजूद थे।

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