पैतृक गांव काराकाट के चिल्हा में सैन्य सम्मान के साथ सूबेदार रामधन पासवान का हुआ अंतिम संस्कार
उनके एकलौते आठ वर्षीय पुत्र सनय ने सूबेदार रामधन पासवान को दी मुखाग्नि
सासाराम। राजस्थान के अलवर में तैनात सूबेदार रामधन पासवान का पार्थिव शरीर आज बुधवार को उनके पैतृक गांव काराकाट प्रखंड के चिल्हा लाया गया जहां गांव से बाहर बागीचे में पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उल्लेखनीय है कि सूबेदार रामधन पासवान 45 वर्ष ऑन ड्यूटी अचानक अस्वस्थ हो गए थे और मंगलवार को उनकी मौत हो गई थी। परिजन बताते हैं कि रामधन 1995 में भारतीय थल सेना के आर्टिलरी रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। फिलहाल उनकी तैनाती राजस्थान के अलवर में थी जहां उनकी मौत हुई। अलवर से सूबेदार रामधन पासवान का शव लाया गया। शव पहुंचते ही पूरा माहौल गमगीन हो उठा। गांव के लाल के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को जवान अपने कंधे पर बागीचे तक ले गए जहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके एकलौते आठ वर्षीय पुत्र सनय ने उन्हें मुखाग्नि दी। रामधन को अंतिम विदाई देने के लिए स्टेशन हेडक्वार्टर गया से नायब सूबेदार सुखविंदर सिंह के नेतृत्व में सेना के जवान पहुंचे। बलिदानी सूबेदार के सम्मान में जवानों ने 21 चक्र गोलियों की सलामी भी दी। सुूबेदार रामधन के आकस्मिक निधन से पूरा परिवार शोक में था। उनकी पत्नी उर्मिला, दो बेटी रुही व रिया का रो-रोकर बुरा हाल था। मृत सूबेदार के भाइयों के भी आंसू रूक नहीं रहे थे। पति के शव को श्रद्धांजलि देते-देते पत्नी उर्मिला मूर्छित होकर गिर पड़ी उपस्थित महिलाओं ने उसे किसी तरह संभाला। परिवार के साथ गांव में भी शोक का माहौल रहा।