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जानकी एक्सप्रेस में यात्रियों को गंदे कोच में यात्रा करने को विवश

कटिहार। मनिहारी जयनगर जानकी एक्सप्रेस ट्रेन में मात्र एक ऐसी एवं स्लीपर कोच रहने के कारण सभ्रांत परिवार,अधिकारी वर्ग एवं व्यापारी वर्ग के यात्रियों को यात्रा करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।कटिहार से दरभंगा जाने एवं आने के सबसे सरल एवं सुगम ट्रेन माना जाता है।दरभंगा में ललित नारायण विश्वविद्यालय, मधेपुरा में भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय एवं पुर्णिया विश्वविद्यालय रहने के कारण महाविद्यालय के प्रोफेसर एवं छात्रों को बराबर जाना-आना पड़ता है।ट्रेन महीने में 20 दिन निर्धारित समय से विलम्ब से चलती है।सभी स्टेशन पर सफाई नहीं करने के कारण कोच में गंदगी फैला रहता है। यात्रियों को गंदे कोच में ही यात्रा करने को विवश है।

शौचालय में नहीं रहता है पानी
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जानकी एक्सप्रेस ट्रेन में कटिहार में शौचालय की टंकी में पानी भरा जाता है।इसके अलावा किसी स्टेशन पर पानी नहीं देने के कारण समस्तीपुर पहुंचते-पहुंचते टंकी खाली हो जाता है।जिसके कारण यात्रियों को नहीं मिल पाता है।नियमित रूप से शौचालय में पानी नहीं दिया जाता है,ना ही सफाई किया जाता है।जिसके कारण यात्री शौचालय जाने से कटराते हैं।

मनिहारी व कटिहार में कोच की नहीं होता सफाई
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जानकी एक्सप्रेस ट्रेन का रखरखाव एवं उचित देखरेख के अभाव में भगवान भरोसे चल रहा है.ट्रेन की सफाई मनिहारी में नहीं किया जाता है।जबकि मनिहारी में 6 घंटे खडी़ रहती है।ना ही कटिहार में कोच की सफाई किया जाता है।जबकि कटिहार में आधा घंटे का ठहराव होता है।अधिकांश दिन प्लेटफार्म संख्या एक पर आती है।जायजा लेने के क्रम में मालूम हुआ कि 11:15 बजे प्लेटफार्म संख्या एक पर जानकी एक्सप्रेस आई. ट्रेन रुकते ही यात्री अपने अपने जगह से उठकर तेजी से दौड़ कर कोच की तरफ बढ़ा और सीट पर जा बैठा। उस समय अधिकांश कोच में बल्ब नहीं चल रहा था। यात्रियों के द्वारा अंधेरे में कोच में प्रवेश करने पर कई वृद्ध यात्रियों को चोटे भी आयी। इसके बावजूद भी कोच में बल्ब नहीं चल रहा था।कई कोच में बल्ब कभी जलता था तो कभी नहीं जलता था. ऐसी स्थिति लगातार जारी रहा। ट्रेन आधे घंटे तक प्लेटफार्म पर खड़ी रही। इसके बावजूद भी एक भी सफाई कर्मी के द्वारा किसी कोच तथा शौचालय की सफाई नहीं किया गया। निर्धारित समय 11:45 बजे जयनगर के लिए प्रस्थान किया।जानकी एक्सप्रेस ट्रेन का सुधि लेने वाला ना रेलवे कर्मचारी था,ना ही पुलिस के जवान।

397 कि.मी.दुरी तय करने में लगता है अठारह घंटा
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जानकी एक्सप्रेस मनिहारी से प्रतिदिन जानकीनगर के लिए खुलती है और जानकीनगर से मनिहारी आती है।मनिहारी से रात्रि 10:15 बजे प्रस्थान करती है. महियारपुर 10:28 बजे, मनसाही 10:39 बजे,कटिहार 11:15 बजे पहुंचती है। आधे घंटे ठहराव के पश्चात 11:45 बजे प्रस्थान करती है।यह ट्रेन पूर्णिया, बनमनखी, मुरलीगंज, दौराम मधेपुरा, सहरसा,सोनबरसा, सिमरी बख्तियारपुर, मानसी,खगड़िया, सलोना,हसनपुर, रोसरा घाट, समस्तीपुर, लहरियासराय,दरभंगा, सकरी, मधुबनी होते हुए जयनगर 10:30 बजे पहुंचती है।मनिहारी से जयनगर की दूरी 397 किलोमीटर है।22 रेलवे स्टेशन पर ठहराव है.ट्रेन का एवरेज स्पीड 33 किलोमीटर प्रति घंटा है। मनिहारी पहुंचने में 12:15 घंटा लगता है।लेकिन ट्रेन विलम्ब रहने के कारण महीने में 25 दिन 15 से 18 घंटा पहुंचने में तथा आने में लग जाता है।जिससे यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

एसी तथा स्लीपर कोच बढा़ने की माँग
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जानकी एक्सप्रेस में कुल 17 कोच शामिल गया है.सभी कोच काफी पुरानी है।जिसमें एक एसी थर्ड कोच तथा एक स्लीपर कोच दिया गया है।सामान्य कोच 13 दिया गया है.16 सितंबर 2018 के पूर्व जानकी एक्सप्रेस में स्लीपर कोच नहीं किया गया था। केवल सामान्य कोच लगाकर चलाया जा रहा था। यात्रियों की मांग पर 16 सितंबर 2018 से एक स्लीपर कोच को जोड़ा जा रहा है।लेकिन मनिहारी, कटिहार, पूर्णिया क्षेत्र से संभ्रांत परिवार, व्यवसाय तथा अधिकारी वर्ग अधिक संख्या में यात्रा करते हैं।लेकिन एकमात्र स्लीपर एवं एसी थर्ड कोच रहने के कारण सभी यात्रियों को जगह नहीं मिल पाता है।ऐसी स्थिति में यात्रियों को यात्रा करना काफी कष्टकारी साबित हो रहा है।यात्रियों ने जानकी एक्सप्रेस में एसी टू के अलावे स्लीपर कोच को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

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