ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

जिले में चल रहे कस्तूरबा विद्यालयों मे मूलभूत सुविधाओं की कमी

अब तक 18 कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का निर्माण किया जा चुका है

सासाराम। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय वर्ष 2006-07 में भारत सरकार द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने वाली आवसीय विद्यालयों की एक श्रृंखला के तहत प्रारंभ किया गया था। जिसके तहत जिला में अब तक 18 कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का निर्माण किया जा चुका है। जिसमें बच्चियों को 12वीं तक की हॉस्टल सुविधा युक्त शिक्षा दी जाती है। इसमें केंद्र व राज्य सरकार 75:25 के अनुपात में खर्च का वहन करती है। बावजूद इसके जिला में चल रही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थिति दयनीय है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे आवासीय कस्तूरबा विद्यालयों के भवन की भी हालत खराब है। विभाग द्वारा भले इन विद्यालयों में सुविधा के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। इन विद्यालयों में पढ़ रही बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ ठहरने और भोजन की व्यवस्था दी जाती है। इसमें 75 फीसदी एससी-एसटी, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय व 25 फीसदी सीटें बीपीएल परिवार की बेटियों से भरी जाती है। बताया जाता है कि जिला में अभी 18 कस्तूरबा विद्यालय चल रहे है, जिनके लिए केवल 16 वार्डेन तैनात किए गए है। अन्य दो कस्तूरबा विद्यालयों के लिए वार्डेन का कार्य शिक्षक के जिम्मे है। जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कस्तूरबा विद्यालयों के षिक्षकों के साथ वार्डेन तक की नियुक्ति राज्य स्तर से की जाती है। इसमें जिला स्तर पर कोई विशेष रौल नही होता। गौरतलब हो कि जिला की 18 कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में 10 से ज्यादा आवासीय विद्यालयों के भवन काफी जर्जर हैं। सेमरा स्थित आवासीय कस्तूरबा विद्यालय के भवन के साथ चाहरदीवारी काफी जर्जर है। छात्राओं के रहने और खाने के कमरों के अलावा इनके खेलकूद के लिए कोई विशेष जगह उपलब्ध नहीं है। थोड़ा जगह भी है तो उसमें घास उगे हुए हैं। बातचीत के क्रम में छात्राओं ने बताया कि बरसात में परिसर में पानी भरा रहता है। छात्राओं को कपड़े सुखाने के लिए भी जगह नहीं है। ऐसे में वे चाहरदीवारी पर कपड़े सुखाने को मजबूर है। जांच पड़ताल में 90 फीसदी कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति बदहाल मिली। छात्राओं के पीने वाले पानी की भी व्यवस्था खराब थी। सासाराम के साथ डेहरी अनुमंडल की कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों की स्थिति बदहाल है। हालांकि कस्तूरबा विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच 1523 छात्राएं रहकर पढ़ाई कर रहे है। छात्राओं ने बताया कि मैन्यू के अनुसार उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि आवासीय कस्तूरबा विद्यालय से संबंधित जो भी समस्या है, उसे लेकर विभाग को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है कि शिक्षकों के साथ अन्य की जो भी समस्याएं हैं उसका जल्द ही निदान हो जाएगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.