ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

त्रिविक्रम द्वादशी पर इस योग में अपनाएं ये पूजा विधि, तीन गुना फल की होगी प्राप्ति

आज 11 जून को जहां एक तरफ गायत्री जयंती (gayatri jayanti 2022) मनाई जा रही है. वहीं ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को त्रिविक्रम द्वादशी (trivakram dwadashi 2022) भी है. ये तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इस दिन भगवान के वामन या त्रिविक्रम रूप (dwadashi worship lord vishnu) की पूजा की जाती है. इस दिन व्रत रखने से शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं. इसके साथ ही अनजाने में हुए पाप भी खत्म हो जाते हैं शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. कहा जाता है कि इस दिन शुभ योग में पूजा-पाठ करने से तीन गुना पुण्य फल मिलती है.

त्रिस्पर्शा योग क्या है
इस दिन सूर्योदय से कुछ मिनटों पहले एकादशी हो, फिर पूरे द्वादशी रहे उसके बाद त्रयोदशी तिथि हो तो, ये त्रिस्पर्शा द्वादशी (trisparsh dwadashi 2022) कहलाती है. यानी कि एक ही दिन में तीनों तिथियां आने से ऐसा योग बनता है. इसलिए, इस दिन पूजा करने का महत्व बढ़ (trivakram dwadashi 2022 shubh yog) जाता है.

त्रिविक्रम द्वादशी 2022 पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय से पहले तिल के पानी से स्नान करने का बहुत महत्व होता है. नहाने के बाद पीले या सफेद वस्त्र पहनकर पंचोपचार से भगवान विष्णु की पूजा करें.इस दिन पूजा में पंचामृत के साथ ही शंख में दूध जल मिलाकर भगवान का अभिषेक करने का विशेष विधान है. ऐसा करने से गोमेध यज्ञ करने जितना फल मिलता है. पूजा में भगवान विष्णु को धूप-दीप दिखाकर नैवेद्य लगाएं पूजा के बाद व्रत-कथा सुनें. इसके बाद आरती करके प्रसाद को बांट दें. इस द्वादशी का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए. व्रत खोलते समय चावल या इससे बनी दूसरी चीजें (trivakram dwadashi 2022 puja vidhi) खाने से बचें.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.