धर्म संसद में हेट स्पीच पर हुई थी FIR, सरेंडर से पहले निरंजनी अखाड़ा प्रमुख से लिया आर्शीवाद
गाजियाबाद: हरिद्वार में वसीम रिजवी ने निरंजनी अखाड़ा प्रमुख का आर्शीवाद लिया। अब वे कुछ देर में सरेंडर कर देंगे।उप्र शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी सरेंडर करने के लिए हरिद्वार पहुंच गए हैं। कुछ ही देर में वे हरिद्वार की अदालत में पेश होंगे, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाएगा। हरिद्वार में वसीम रिजवी सबसे पहले निरंजनी अखाड़ा पहुंचे। यहां अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्रपुरी से भेंट करके उनका आर्शीवाद लिया। इसके बाद वे हरिद्वार कचहरी परिसर में पहुंच गए हैं। फिलहाल वे अपने वकील के चैंबर में मौजूद हैं। यहां कुछ दस्तावेजी प्रक्रिया चल रही है। कुछ ही देर में वे सरेंडर कर सकते हैं।हेट स्पीच के आरोप में 13 जनवरी 2022 को वसीम रिजवी को हरिद्वार पुलिस ने गिरफ्तार किया था।चार महीने जेल में रहे, अंतरिम जमानत भी हुई खत्मरिजवी पर हेट स्पीच का आरोप है। 17 से 19 दिसंबर 2021 तक हरिद्वार के वेद निकेतन में धर्म संसद हुई थी। आरोप है कि इसमें एक समुदाय को खत्म करने जैसी बातें कही गईं। ज्वालापुर निवासी गुलबहार खां ने हरिद्वार शहर कोतवाली में 23 दिसंबर 2021 को करीब 10 धर्मगुरुओं के खिलाफ हेट स्पीच की FIR कराई थी। इसमें वसीम रिजवी भी एक थे। हरिद्वार पुलिस ने 13 जनवरी 2022 को वसीम रिजवी को यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। वे करीब 4 महीने तक जेल में रहे थे। इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। 29 अगस्त 2022 को अंतरिम जमानत समाप्त हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने वसीम रिजवी को 2 सितंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया था।वसीम रिजवी को गाजियाबाद में यति नरसिंहानंद गिरि ने ही सनातन धर्म ग्रहण कराया था।अब अलग हैं रिजवी-नरसिंहानंद की राहेंहेट स्पीच के आरोप में वसीम रिजवी के साथ गाजियाबाद में डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि भी जेल गए थे। हालांकि उन्हें हरिद्वार कोर्ट से महज एक महीने के भीतर ही जमानत मिल गई थी। वसीम रिजवी का धर्मांतरण कराने, उनकी पुस्तक मुहम्मद का विमोचन करने और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत दिलाने में नरसिंहानंद गिरि की अहम भूमिका रही। हालांकि जिस दिन रिजवी जेल से बाहर आए, उसी दिन दोनों की राहें अलग-अलग हो गईं। तब से आज तक दोनों ने आपस में न कोई बातचीत की है और न ही मिलने का प्रयास किया है।
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