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दूसरे विश्व युद्ध और भारत-पाक लड़ाई में योगदान, देश को जवान समर्पित कर रही 112 इन्फेंट्री बटालियन टीए डोगरा

जालंधर: टीए चौक पर पलटन के शुरुआती दिनों और आज के जवान के स्टैच्यू को बनाया गया है जो चौक की खूबसूरती और पलटन का इतिहास खुद बता रही है। साथ ही 3डी पेंटिंग में कांगड़ा फोर्ट भी अपने बारे में जानकारी दे रहा है।जिले के बहुत कम लोग ही जानते हैं कि सरहदों की सुरक्षा और देश की शान बरकरार रखने के लिए जालंधर की पलटन है और उसने 100 साल पूरे कर लिए हैं। इसका नाम 112 इन्फेंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) डोगरा है जो जालंधर टेरियर्स के नाम से भी जानी जाती है। इसके पहले कमांडिंग ऑफिसर कर्नल एचएस ढिल्लन, 1922 में दूसरे कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आरसीबी बरिस्टो रहे। अब कर्नल अनंत डोगरा हैं। जालंधर टेरियर्स ने दूसरे विश्व युद्ध, 1965 की लड़ाई में भी 24 पाकिस्तानी पैराट्रूपर्स दबोचे। 1971 के युद्ध के अलावा बड़े ऑपरेशन में बटालियन ने अहम योगदान दिया।पलटन के पास 3 सेना मेडल इस बात पर गर्व दिलाते हैं कि देश से बढ़कर उसके लिए और कुछ नहीं है। 1922 में जब रेजिमेंट को बनाया गया तब 11/7 इंडियन टेरिटोरियल फोर्स (आईटीएफ) डोगरा रेजिमेंट के नाम से जानी जाती थी, फिर 1941 में 6/17 आईटीएफ डोगरा रेजिमेंट, 1946-48 तक 17 आईटीएफ डोगरा रेजिमेंट नाम रहा। आजादी के बाद 112 इन्फेंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) डोगरा के रूप में सेवाएं देने शुरू कर दीं। मौजूदा समय में 5 राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, हरियाणा और पंजाब) के जवान बटालियन का हिस्सा हैं।11/7 आईटीएफ से शुरुआत, आजादी के बाद टेरिटोरियल आर्मी13 स्टैच्यू बता रहे-नौकरीपेशा इंसान कैसे बनता है सेना का हिस्साविकसित देश में अपनी एक सिटीजन आर्मी है। भारत में भी इसी बात को आम लोगों को समझाने के लिए पलटन के अधिकारियों और जवानों ने टीए चौक में सिटीजन आर्मी के रूप में 13 पुतले तैयार किए हैं, जो किसान, वकील और इंजीनियर के आर्मी में आने और परिश्रम के बाद फौजी के रूप को बता रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सिटीजन आर्मी के लिए पुरुषों के साथ महिलाएं भी पिछले साल से हिस्सा बनने लगी हैं।टीए चौक जो इतिहास से करवा रहा रूबरूपलटन की शताब्दी पर जालंधर कैंट में हेडक्वार्टर के नजदीक टीए चौक तैयार किया गया है, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नयन, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, एडीसी (कर्नल ऑफ द डोगरा रेजिमेंट एंड डोगरा स्काउट्स), लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा एवीएसएम, एसएम (जीओसी एचक्यू11 कोरपस), ब्रिगेडियर किशोर मल्होत्रा एसएम (सीडीआर, टीए ग्रुप एक्यू वेस्टर्न कमांड) का अहम योगदान रहा। चौक को अधिकारियों की सपोर्ट के साथ जवानों ने खुद बनाया है। इसमें पलटन के शुरुआती दिनों और आज के जवान के स्टैच्यू को बनाया गया है जो चौक की खूबसूरती और पलटन का इतिहास खुद बता रही है। साथ ही 3डी पेंटिंग में कांगड़ा फोर्ट भी अपने बारे में जानकारी दे रहा है।

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