ऐतिहासिक युद्ध की 125वीं वर्षगांठ पर वीर योद्धाओं को महानाटक से किया जाएगा याद
जालंधर: नाटक का दृश्यजालंधर के गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में आज ऐतिहासिक सारागढ़ी जंग की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर महानाटक का आयोजन होगा। 12 सितंबर 1897 को सारागढ़ी में 21 सिख सैनिक की 10,000 अफगानी सैनिकों के साथ युद्ध की वीर गाथा को लाइट एंड साउंड सिस्टम के माध्यम से जीवंत करके दिखाया जाएगा।नाटक में अफगान सैनिकों की भूमिका में कलाकारसारागढ़ी में बहादुर सिख सैनिकों ने पश्तून जनजातियों की विशाल सेना को 6 घंटे से अधिक समय तक रोके रखा था। जंग-ए-आजादी सारागढ़ी जिसका नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरी अक्षरों में दर्ज है के दौरान सिख योद्धाओं ने अपनी बहादुरी की एक अनूठी मिसाल पैदा की थी। कोई सिख सैनिक अफगानों की इतनी बड़ी फौज को देख मोर्चा छोड़ कर नहीं भागा था बल्कि शरीर में जब तक सांसे थीं तब तक लड़ाई लड़ी और अफगान सेना को आगे नहीं बढ़ने दिया।युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन आज जंग-ए-आजादी सारागढ़ी की 125वीं वर्षगांठ पर इस महानाटक का आयोजन करवा रहा है। इस महानाटक का मंचन पंजाब आर्ट थियेटर करेगा। डिप्टी कमिश्नर जालंधर जसप्रीत सिंह ने कहा कि साईट एंड साउंड के सुमेल से दर्शकों को सारागढ़ी की लड़ाई के गौरवशाली इतिहास और सिख योद्धाओं की बहादुरी की अविश्वसनीय मिसाल से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को शाम 7 बजे प्रस्तुत किया जाने वाला यह महानाटक एक घंटे का होगा, जिसका निर्देशन मशहूर निर्देशक हरबख्श सिंह लता ने किया है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कहानी को 40 कलाकार 4 अलग-अलग चरणों में प्रस्तुत करेंगे।डीसी जसप्रीत सिंह ने कहा कि प्रशासन की इस पहल से वीरता की समृद्ध विरासत की जानकारी देकर लोगों, विशेषकर युवाओं में अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को जागृत किया जाएगा। उन्होंने जिले के लोगों, विशेषकर युवाओं को जंग-ए-सारागढ़ी देखने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि उन्हें फिल्म और नाटक के संयोजन के माध्यम से सारागढ़ी के योद्धाओं की अद्वितीय वीरता को देखने का अवसर मिलेगा।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.