रेवाड़ी का मामला; महिला बोली- नए डॉक्यूमेंट बनवा लिए, 5 साल से भटक रही, कोई सुनता ही नहीं
रेवाड़ी: वॉकर के सहारे चलती देवकी देवी।हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन के लिए बुजुर्गों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से हजारों बुजुर्गों की पेंशन कट गई। ऐसा ही कुछ रेवाड़ी की रहने वाली 95 साल देवकी के साथ हुआ। आधार कार्ड नहीं होने की वजह से 5 साल पहले उनकी पेंशन बंद कर दी गई। अब आधार कार्ड से लेकर फैमिली आईडी तक बन चुकी है, लेकिन 5 माह से अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे।रेवाड़ी शहर के मोहल्ला शुक्रपुरा निवासी देवकी देवी (95) वृद्धावस्था पेंशन ले रही थी। वर्ष 2017 में अचानक उनकी पेंशन आनी बंद हो गई। देवकी के पास उनकी एक विधवा बेटी और बेटा रहता है। एक कमरे के मकान में तीनों रहते हैं। बेटा चाय की फड़ी लगाता है। देवकी का पेंशन से ही गुजारा चल रहा था। अधिकारियों से पता किया तो जानकारी मिली कि उनका आधार कार्ड नहीं है। उम्र ज्यादा होने की वजह से आधार कार्ड बनवाना भी मुश्किल हो गया।अपने बेटे और बेटी के साथ देवकी देवी।लेकिन देवकी ने हार नहीं मानी। चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद देवकी देवी ने बेटे के साथ सरकारी कार्यालयों में कई साल चक्कर काटे और आधार कार्ड बन गया, लेकिन अब पेंशन के लिए सरकार की तरफ से फैमिली आईडी अनिवार्य कर दी गई। आधार कार्ड के बाद देवकी ने 5 माह पहले फैमिली आईडी भी बनवा ली, लेकिन बावजूद इसके अधिकारियों ने देवकी की पेंशन चालू नहीं की। DC से लेकर चंडीगढ़ तक अधिकारियों को शिकायतें भेजी गईं, लेकिन आज तक उनकी पेंशन नहीं बन पाई है।सिस्टम के आगे बेबस हो गई देवकीदेवकी का कहना है कि सरकार की तरफ से बुजुर्गों को सम्मान के रूप में दी जाने वाली पेंशन के लिए वह सिस्टम के आगे बेबस है।इतनी उम्र का भी ख्याल नहीं रखा गया। चक्कर कटवाए जा रहे हैं, जबकि पहले उन्हें असानी से पेंशन मिल जाती थी। जो दस्तावेज मांगे गए, वह अब तैयार करा लिए हैं, लेकिन इसके बाद भी उनकी पेंशन दोबारा चालू करने के लिए सुनवाई नहीं हो रही है। देवकी का कहना है कि पेंशन के सहारे ही उनका बुढ़ापा कट रहा था, लेकिन 5 साल पहले उसे भी छीन लिया।आपबीती सुनाती हुई देवकी देवी15 हजार से ज्यादा बुजुर्गों की पेंशन कटीपरिवार पहचान पत्र लागू होने के बाद प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा बुजुर्गों की पेंशन काट दी गई। इनमें बहुत से लोगों को मृत दिखाकर उनकी पेंशन बंद की गई। मामले ने तूल उस वक्त पकड़ा, जब 4 दिन पहले रोहतक में 102 साल के दुलीचंद ने खुद के जिंदा रहने का प्रमाण देते हुए अपनी बरात निकाली। अगले ही दिन दुलीचंद की पेंशन चालू कर दी गई, लेकिन दुलीचंद ने भी ऐलान कर दिया कि जब तक 15 हजार लोगों की पेंशन बहाल नहीं होती, वे अपनी बुढ़ापा पेंशन नहीं लेंगे।
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