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SGPC की भारत सरकार से मामले में हस्ताक्षेप की मांग, बोले- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची

अमृतसर: तालिबान सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अफगानिस्तान से बाहर भेजने पर रोक लगाई है। इसकी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने कड़ी निंदा की है। इस घटना के बाद SGPC के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से मामले में हस्ताक्षेप करने को कहा है। उन्होंने इसे तालिबान सरकार का धार्मिक मामलों में हस्ताक्षेप बताया है।गौरतलब है कि करते परवान गुरुद्वारा में हुए बम ब्लास्ट और सिखों की टारगेट किलिंग के बाद से ही भारत सरकार अफगानिस्तान में रहने वाले सिखों को ई-वीजा दे रही है। बीते कुछ समय से तालिबान सरकार शांत हो चुके माहौल का हवाला देकर सिखों व हिंदुओं को अफगानिस्तान से वापस लौटने की भी अपील कर रही है। इसी बीच गत 11 सितंबर को 60 अफगान सिखों को भारत आना था।वे अपने साथ अफगानिस्तान से श्री गुरु ग्रंथ साहिब भी ला रहे थे, लेकिन अफगानिस्तान ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब और अन्य धार्मिक ग्रंथों को ले जाने से रोक दिया। इसके चलते 60 सिख भी भारत के लिए उड़ान नहीं भर सके। अफगान संस्कृति मंत्रालय ने धार्मिक ग्रंथों को अफगानिस्तान से बाहर ले जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।अफगान विदेश मंत्रालय इस बात पर अड़ा है कि जब तक अफगान संस्कृति और सूचना मंत्रालय से आधिकारिक पुष्टि पत्र प्राप्त नहीं हो जाता, धार्मिक ग्रंथों को अफगानिस्तान से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। SGPC प्रधान धामी ने तालिबान सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब व अन्य सिख ग्रंथों को अफगानिस्तान से बाहर भेजने पर रोक लगाने की निंदा की है।धामी का कहना है कि अफगानिस्तान में सिख सुरक्षित नहीं हैं, इसलिए ही वे वहां से पलायन कर रहे हैं। एक तरफ अफगानिस्तान में सिख गुरुद्वारों पर हमले हो रहे हैं और दूसरी तरफ धार्मिक ग्रंथों को ले जाने से रोकना सीधे तौर पर सिखों के धार्मिक मामलों में दखल-अंदाजी है। अफगानिस्तान से सिखों के पलायन के बाद सिख धार्मिक ग्रंथों का ध्यान कौन रखेगा।उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को सिखों की भावनाओं के विरूद्ध फैसले नहीं करने चाहिएं। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व विदेश मंत्रालय से इस मामले में दखल देने की अपील की है।

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