मध्य प्रदेश में तीन साल तक ही आरक्षित रखे जाएंगे पदोन्नति के लिए एससी-एसटी के पद
भोपाल। मध्य प्रदेश में छह साल बाद अधिकारियों-कर्मचारियों को अब पदोन्नति मिल सकती है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से परामर्श करके पदोन्न्ति नियम-2022 तैयार कर लिए हैं। इसमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए तीन साल ही पद आरक्षित रखे जाएंगे। इस अवधि में यदि संबंधित वर्ग के पात्र अधिकारी-कर्मचारी नहीं मिलते हैं तो फिर इन्हें शून्य घोषित कर नए सिरे से गणना की जाएगी। इसी तरह पदोन्नति के पदों प्रतिवर्ष निर्धारित होंगे। आरक्षण उपलब्ध पदों के आधार तय होगा। पदोन्नति नियम 2002 के निरस्त होने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग काफी समय से इस प्रयास में था कि नए नियम बनाकर पदोन्नति प्रारंभ कर दी जाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके लिए गृह मंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया था। समिति ने तीन बैठकें की और आरक्षित व अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी संगठनों का पक्ष लिया। इसके आधार पर विभाग ने नियम का प्रारूप तैयार करके विधि विभाग को भेजा था। इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित पद पर पदोन्नति के लिए पात्र अधिकारी-कर्मचारी नहीं मिलने पर पद रिक्त रखा जाना प्रस्तावित था। इस पर विधि विभाग ने आपत्ति उठाते हुए था कि आखिर कब तक पदों का रिक्त रखा जा सकता है। इसी तरह पदों की गणना के तरीके को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की सलाह दी थी। सूत्रों के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग ने विचार-विमर्श करने के बाद अब यह प्रस्तावित किया है कि तीन वर्ष तक ही अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए पदोन्नति के पद रिक्त रखे जाएंगे। यदि इस अवधि में पात्र अधिकारी-कर्मचारी नहीं मिलते हैं तो फिर पद शून्य घोषित कर नए सिरे से पदों की गणना होगा। प्रतिवर्ष एक जनवरी की स्थिति में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर तय होगा कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को कितने प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। गौरतलब है कि पदोन्नति न होने से लगभग 60 हजार कर्मचारी अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए।
संयुक्त सूची बनेगी, न्यूनतम अंक होना रहेगा अनिवार्य
प्रस्तावित नियम के अनुसार प्रतिवर्ष विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक होगी। इसमें रिक्तियों के आधार पर चयन सूची तैयार होगी। पांच वर्ष के गोपनीय प्रतिवेदनों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर अंक निर्धारित होंगे। प्रथम श्रेणी के पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम 15 अंक होने आवश्यक होंगे। इसी तरह द्वितीय श्रेणी के पदों के लिए 14, तृतीय श्रेणी के लिए 12 अंक की अनिवार्यता रहेगी।
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