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जो स्वयं जदयू को कमजोर करने की ‘डील’ में जुटे, वही पार्टी को ‘बचाने’ की बात कर रहे: उमेश कुशवाहा

किसी अवसरवादी की मजाल नहीं कि जदयू की नींव की एक ईंट भी हिला दे

पटना। बिहार प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने उपेन्द्र कुशवाहा द्वारा जारी पत्र पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जिनके मान-सम्मान का इतना ख्याल रखा, वही दलीय मर्यादा का इस तरह उल्लंघन करेंगे, यह बात सहज विश्वास करने योग्य नहीं लगती। उन्होंने कहा कि हद तो यह है कि जो स्वयं जदयू को कमजोर करने की ‘डील’ में जुटे हैं, वही पार्टी को ‘बचाने’ की बात कर रहे हैं! जिन्हें जदयू का अस्तित्व खतरे में दिख रहा है, वे शायद यह भूल रहे हैं कि यह पार्टी नीतीश कुमार के संघर्ष से उपजी है। किसी अवसरवादी की मजाल नहीं कि इसकी नींव की एक ईंट भी हिला दें।
उन्होंने आगे कहा कि जदयू का एक-एक कार्यकर्ता श्री नीतीश कुमार के संस्कार में ढला है, लेकिन उपेन्द्र कुशवाहा ने इतने वर्षों में भी उनसे सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का कोई पाठ नहीं सीख पाए। वे पार्टी के संयम और संस्कार की लगातार परीक्षा ले रहे हैं। वे शायद इस मुगालते में हैं कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता उनकी अनर्गल बातों में आ जाएंगे। पर सच यह है कि उनकी मंशा धरी की धरी रह जाएगी।
राजद के वरिष्ठ नेता व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव स्पष्ट तौर पर कह चुके हैं कि राजद से जदयू की एक ही डील है और वो है भाजपा को हटाना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ‘‘ललन’’ ने भी आज ट्वीट कर उपेन्द्र कुशवाहा को बात को मनगढ़ंत करार दिया है। ऐसे में कहने को कुछ शेष नहीं रह जाता। फिर भी अगर पार्टी के जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति अपने स्वार्थ में अंधा होकर बैठक बुलाने और कार्यकर्ताओं को बरगलाने की कोशिश करे तो इसकी जितनी निंदा की जाय, वह कम होगी।

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