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अप्रशिक्षित चालकों के कारण बढ़ा है सड़कों पर जोखिम

फतुहा। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार कोई ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल बने इसमें 3 से 18 एकड़ भूमि श्रेणी के अनुसार प्रजापत पार्किंग एरिया कम से कम 2 क्लास रूम, प्रशिक्षण में सहयोग करने वाली सामग्री जैसे कंप्यूटर, मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर, ड्राइविंग ट्रेक ,वर्कशॉप आदि होने चाहिए।
मोटर वाहन संशोधन कानून 2019 में आरटीओ कार्यालय में पारदर्शिता की पहल चुकी है लेकिन इससे ड्राइविंग की दशा सुधारने में कोई खास मदद नहीं मिली, क्योंकि ड्राइविंग का ढांचा ही नहीं बन पाया, केंद्र की सहायता से इंस्टीट्यूट फॉर ड्राइवर ट्रेंनिंग एंड रिसर्च के रूप में राज्यों में इस तरह के कुछ संस्थान खुले हैं ,लेकिन इससे मुट्ठी भर लोग ही ड्राइविंग में प्रशिक्षित होकर निकल रहे हैं यह हाल तब है जब खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 78% हादसों का दोष ड्राइवरों की खामी की दिया है। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने ड्राइवरों की ट्रेडिंग से जुड़े संस्थानों की स्थापना और उनकी गिनती के लिए दिशानिर्देश जारी किए और ड्राइविंग को वैज्ञानिक व्यवस्थित बनाने अमल की जरूरत जताई।
हर साल लगभग साढ़े तीन करोड़ ड्राइविंग लाइसेंस जारी हो रहे हैं। इनमें 95% से ज्यादा वे लाइसेंसी हैं जिनमें किसी स्कूल से ड्राइविंग का प्रशिक्षण नहीं लिया गया है। आरटीओ में एक तो टेस्टिंग फुलप्रूफ व्यवस्था नहीं है और अगर जांच परख होती भी है तो केवल ड्राइविंग स्किल यानी कौशल की ,ज्ञान और विवेक कि नहीं। समस्या केवल सीखने वालों की नहीं सिखाने वालों की भी है। स्थिति यह है कि हमारे यहां इंस्ट्रक्टर भी सही तरह से प्रशिक्षित नहीं है। उन्हें खुद ही नियमों के साथ साइन सिग्नल की जानकारी नहीं होती। दूसरा सबसे बड़ा जोखिम है की नीम़ोछिया ड्राइवर से बढ़ गई है सड़क दुर्घटना है। नीमोछिया ड्राइवर से सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा ही बढ़ गई है। नीमोछिया ड्राइवर इस तरह लहरिया कट में चलाते हैं कि सामने वाले वाहन चकमा खा कर आपस में टकरा जाते हैं जिससे कारण कई जानलेवा हादसा भी हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है।

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