ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

बिहार के पत्रकारों की हालत ये है कि वो सबकी दशा लिख सकते हैं, लेकिन अपनी व्यथा नहीं लिख सकते: प्रशांत किशोर

मोतिहारी। जन सुराज पदयात्रा के दौरान वैशाली के भगवानपुर प्रखंड में मीडिया संवाद के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि पदयात्रा से पहले जब मैं जिलें में घूम रहा था तब जो पत्रकार और युट्यूबर्स थे उनमें से ज़्यादतर 15 सौ से 2 हजार रुपये में काम करते हैं। ये बहुत आश्चर्यजनक बात है कि कोई कैसे आज के समय में 2 हजार रुपये में अपना जीवन यापन कर सकता है? तो पत्रकार यही कहते हैं कि पत्रकारिता से जीवन नहीं चलता है, जीवन खेती किसानी से चलता है। ये एक इज्जत प्रतिष्ठा का काम है इसलिए पत्रकारिता कर रहे हैं, तो बिहार के पत्रकारों की हालत उस डॉक्टर के जैसी है जो पूरी दुनिया का इलाज कर सकता है। लेकिन अपना इलाज नहीं कर सकता है उसी तरह आप सारी दुनिया के बारे में लिख सकते है लेकिन अपनी व्यथा के बारे में नहीं लिख सकते है लेकिन बिहार के पत्रकारों को वो मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है जो दूसरे राज्य के पत्रकारों को उपलब्ध है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.