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उल्टी-दस्त होने के बाद अस्पताल नहीं गए, भाई-बहन की मौत

जशपुर: चाहे बुखार हो या उल्टी-दस्त। आज भी गांव में लोग किसी के बीमार होने पर सबसे पहले यह शक करते हैं कि किसी ने नजर लगा दी या भूत-प्रेत की बाधा है। इसी अंधविश्वास ने दो मासूम बच्चों की जान ले ली। बगीचा ब्लॉक के कुदमुरा पतराटोली में बुखार व उल्टी दस्त से भाई-बहन की मौत हो गई। वहीं मृत बच्चों की बड़ी बहन व माता-पिता कुनकुरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। कुदमुरा पतराटोली निवासी भीम चौहान के दोनों बच्चे सूरज 9 वर्ष और सुभद्रा 11 वर्ष शुक्रवार को स्कूल गए थे। सूरज को स्कूल में ही बुखार आया और उसने उल्टियां करनी शुरू कर दी।यह देख स्कूल के शिक्षकों ने उसे छुट्टी दे दी। सूरज को गांव की स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने दवाइयां दी थी और कहा था कि इसे घर जाकर खा लेना। सूरज स्कूल से घर पहुंचा तो उसकी बड़ी बहन सुभद्रा को भी स्कूल में यही शिकायत आई। सुभद्रा भी घर चली आई। घर में दोनों बच्चे बुखार से तप रहे थे और उल्टियां कर रहे थे। यह देख भीम चौहान को लगा कि उसके दोनों बच्चों पर किसी ने जादू-टोना कर दिया है। भीम चौहान घर में झाड़फूंक करने वाले को बुलाया और झाड़फूंक शुरू करा दी। झाड़फूंक करने वाले ने भी घंटों तक कई बीमार बच्चों को उनके घर पर रोके रखा।किस वजह से बीमार हुए, पता नहीं चलाबगीचा बीएमओ डॉ. सीआर भगत ने बताया कि एक परिवार के सभी सदस्यों का उल्टी-दस्त से पीड़ित होना और बच्चों में बुखार का आना संकेत देता है कि सभी फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए हैं। परिवार के सदस्यों ने जरूर भोजन में कुछ ऐसा खा लिया होगा, जो कि विषाक्त था, पर किस चीज के खाने की वजह से सभी बीमार पड़े, यह अभी पता नहीं चल पाया है, क्योंकि परिवार के सभी सदस्य बीमार हैं।गांव में नहीं फैली है बीमारी, एक प्रभावितघटना के बाद बगीचा तहसीलदार अविनाश चौहान जांच के लिए कुदमुरा पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक परिवार के सभी सदस्य उल्टी-दस्त के शिकार हुए हैं। पूरे गांव में उल्टी-दस्त फैल गया है, ऐसी कोई बात सामने नहीं आए हैं। गांव में अन्य परिवार के लोग स्वस्थ हैं। गांव में पानी की सुविधा के लिए हैंडपंप लगा है। ग्रामीणों के दूषित पानी पीने जैसी भी कोई बात सामने नहीं आई है।सबकी तबीयत बिगड़ी तब निकले अस्पतालदोनों बच्चों की हालत काफी गंभीर होने लगी और इसी बीच भीम चौहान, उसकी पत्नी व बड़ी बेटी सावित्री को भी उल्टी-दस्त शुरू हो गई। यह देखने के बाद गांव वालों की सलाह से भीम चौहान परिवार के सभी सदस्यों को लेकर बगीचा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जाने के बजाए सीधे कुनकुरी के निजी अस्पताल के लिए निकला। अस्पताल जाते वक्त सूरज ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, वहीं बहन सुभद्रा की अस्पताल में मौत हो गई।

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