बिजली एक्ट-2012 संशोधन बिल का करेंगे विरोध, दिल्ली जंतर मंतर पर देंगे धरना
जालंधर: जालंधर से दिल्ली के लिए रवाना हुए किसानकिसान आज एक बार फिर से दिल्ली रवाना हो गए हैं। दिल्ली में किसान जंतर मंतर पर इकट्ठा होंगे। वहां पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। मोर्चा बिजली एक्ट संशोधन बिल के खिलाफ खोला जाएगा। किसान जंतर मंतर पर ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर नहीं पहुंचेगे बल्कि ट्रेन, बसों और अपने निजी वाहनों के माध्यम से संयुक्त किसान मोर्चा की काल पर जा रहे हैं।किसान नेताओं ने कहा कि जब दिल्ली से आंदोलन को खत्म किया गया था तो केंद्र सरकार के साथ कुछ शर्तों पर समझौता हुआ था। केंद्र सरकार ने उस वक्त धरना खत्म करवाने के लिए सबी शर्तों को मान लिया था, लेकिन अब उनसे पीछे हटच रही है। किसानों के साथ केंद्र सरकार का समझौता हुआ था कि बिजली एक्ट-2012 में जो केंद्र सरकार बिल लाकर संशोधन करने जा रही है वह संशोधित नहीं करेगी।केंद्र सरकार ने भी समझौते में कहा था कि वह इस संशोधन एक्ट बिल को नहीं सदन में नहीं लेकर आएंगे। लेकिन अब केंद्र सरकार बिजली एक्ट-2012 में संशोधित बिल सदन में लेकर आ रही है। उन्होनें कहा कि केंद्र सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है। खुद ही कहकर अब अपनी बात से पीछे हट रही है। इसका विरोध आज जंतर मंतर पर धरना लगा कर किया जाएगा।भारतीय किसान यूनियन सिद्धपुर के प्रधान कुलविंदर सिंह मशियाणा ने कहा कि किसानों की कमाई दोगुणी कर देने का राग अलापने वाली केंद्र सरकार किसानी को डुबोने पर तुली हुई है। कारपोरेट घरानों के साथ मिलकर साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जो एनपीके 0.52.34 पिछले साल 150 रुपये था वही अब 200 रुपये पहुंच गया है।इसी तरह से एनपीके 13.0.45 जो 130 रुपये था 145 रूपये, एनपीके 19.19.19 जो 110 था वह 160 पर पहुंच गया है। पोटाश का एक गट्टा 950 रुपये का था उसकी कीमत 1700 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल जो धान 1960 रुपये क्विंटल खरीदा गया था इस बार 2040 रुपये एमएसपी तय हो रहा है। यानी किसान की फसल का एक किलो का भाव सिर्फ एक रुपया ही बढ़ा है जबकि कारपोरेट जो बना है उसका भाव सीधा सौ रुपये बढ़ रहा है।कुलविंदर सिंह ने कहा कि सरकार साजिश के तहत किसानों को डुबोने की कोशिश कर रही है। इसलिए अब बिजली बिल में संसोधन कर पहले से कर्ज के बोझ तले दबे किसानों पर और बोझ डालने जा रही है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग बीएसएनएल की तर्ज पर निजी हाथों में सौंपने जा रही है। जैसे बीएसएनएल को सरकार ने सोची समझी चाल के तहत डुबोकर कारपोरेट घरानों को आगे बढ़ाया वैसे ही अब बिजली में होने जा रहा है।
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