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एईएस के प्रखंडस्तरीय नोडल को राज्य से मिला वर्चुअली प्रशिक्षण

बुधवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ समापन

प्रत्येक प्रखंड के एमओआईसी और तीन स्वास्थ्य कर्मियों को मिला प्रशिक्षण

वैशाली। चमकी से प्रभावित बच्चे को तभी रेफर किया जाए जब तक कि उसके स्वास्थ्य को स्थिर न किया जाए। अगर किसी कारणवश बच्चे को तुरंत रेफर की आवश्यकता है तो उसे वैसे एंबुलेंस से चिह्नित रेफरल अस्पताल भेजा जाए जिस पर जीवन रक्षक प्रणाली मौजूद हो। ये बातें जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुनील केसरी ने जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में बुधवार को हुए एईएस नोडल के दो दिवसीय वर्चुअल प्रशिक्षण के दौरान कही। इस प्रशिक्षण में प्रत्येक प्रखंड से एक एईएस नोडल के साथ तीन स्वास्थ्य कर्मी भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चमकी के 2021 के एसओपी के अनुसार इलाज और चमकी के विभिन्न पहलुओं के बारे बताना था। डॉ केसरी ने कहा कि चमकी किसी एक बीमारी का नाम नहीं बल्कि यह कई अलग तरह की बीमारियों का समावेश है। जिसमें मिर्गी या चमकी आना आम है। वहीं इस बीमारी में ग्लूकोज के लेवल की कमी भी सबसे ज्यादा देखी जाती है। वहीं डॉ केसरी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान एईएस पर इलाज के अलावा सभी नोडलों को स्वास्थ्य केंद्र पर एईएस/जेई के आवश्यक दवा एवं उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था, प्रशिक्षण के बाद चिकित्सा पदाधिकारियों, एएनएम, जीएनएम, सीएचओ, जीविका और आशा को एईएस के कारण लक्षण और बचाव पर प्रशिक्षित किया जाए। एईएस नोडल ग्रामीण चिकित्सकों के साथ एक बैठक करें जिसमें चमकी के लक्षण वाले मरीजों को तुरंत ही सरकारी अस्पताल भेजने का आग्रह और चमकी के हो जाने पर ओझा गुनी, झाड़ फूंक में पड़कर अपना समय बर्बाद न करने की सलाह दी गयी। इस वर्चुअल प्रशिक्षण में जिला से जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुनील केसरी, भीडीसीओ राजीव कुमार, प्रीति आनंद, भीबीडीसी कुमार धीरेन्द्र, जिला एपिडेमोलॉजिस्ट डॉ महेश्वरी सिंह महेश, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी रितू राज एवं डीपीसी राजेश कुमार सहित अन्य शामिल हुए।

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