ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

आरा: विश्वमोहन चौधरी”सन्त”की रिर्पोट

आरा: स्थानीय एम पी बाग के श्री प्रभाकर पाण्डेय पुत्र स्व.दिवाकर पांडे ने समस्त आरा वासी के लिए श्री भागवत यज्ञ कथा का आयोजन किया है, जो कि 23 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा। 1मई को भंडारा का आयोजन किया गया है। वृंदावन से अनन्त श्री विभूषित जगद्गुरू रामनुजाचार्य स्वामी अनन्ताचार्यजी महाराज श्रीराधारासबिहारी धाम, पानीघाट परिक्रमा मार्ग, श्रीधाम वृन्दावन (मथुरा) उ. प्र., के द्वारा सभी दिन कथा वाचन होगा। आरा के अधिकांस महिला तथा पुरुष ने आज कलश यात्रा में भाग लिया। क्या है भागवत कथा आईए जानते हैं जब सौभाग्य का उदय होता है तभी भागवत कथा सुनने मिलती है। भगवान सत्य स्वरूप हैं। चित्त स्वरूप हैं। आनंद स्वरूप हैं। दैहिक, देविक, भौतिक तापों का हरण करने वाले हैं। सूतजी महाराज ने ८८ हजार ऋषियों को नैमीशारण्य में भागवत कथा सुनाई थी। वृंदावन में भक्ति का महत्व है। ज्ञान वैराग्य नहीं है, नारद जी का अवतारों में तीसरा अवतार है। उन्होंने कहा कि भागवत का अर्थ है भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तारण। प्रेत योनि से मुक्त करने वाली भागवत कथा है। आत्मदेव ब्राह्मण की कोई संतान नहीं थी। निराश ब्राह्मण को एक संत ने फल दिया, कहा पत्नी को खिलाना लाभ होगा। उसने फल स्वयं न खाकर गाय को दे दिया और पति से झूठ बोल दिया। समय पूर्ण होने पर प ि- धुंधली ने अपनी बहन का पुत्र लिया और स्वयं का बताकर नाम धुंधकारी रखा। उसी समय गाय को भी पुत्र हुआ, जिसका नाम गौकर्ण रखा गया। धुंधकारी अत्याचारी, अहंकारी था जबकि गौकर्ण विद्वान था। धुंधकारी से परेशान ब्राह्मण वन गमन कर गए। मां धुंधली ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली। धुंधकारी की वेश्याओं ने निर्मम हत्या कर दी। असमय मौत ने उन्हें प्रेत बना दिया। परिजनों की मुक्ति की आकांक्षा से गौकर्ण ने भागवत सप्ताह यज्ञ कराया। जिससे प्रेत योनि से मुक्ति मिली।

Leave A Reply

Your email address will not be published.