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जब-जब ऊंची इमारतों में लगी आग तब-तब फेल हुआ निगम-प्रशासन

भोपाल। सतुपड़ा भवन में आग लगने के बाद राहत और बचाव मुश्किल हो गया। यहां रखे दस्तावेज, फर्नीचर, कम्प्यूटर और एसी समेत अन्य सामान जलकर राख होने के बाद ही आग बुझाई जा सकी। राजधानी में ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले भी बीते 10 वर्षों में एक दर्जन से अधिक सरकारी इमारतों में आग लग चुकी है, लेकिल उनके भी हाल सतपुड़ा जैसे ही रहे।

नगर निगम के फायर अमले की 32 दमकलों में से महज 10 गाड़ियां ऐसी हैं, जो आग बुझाने के लिए फिट हैं। जबकि 16 दमकलें 20 से 46 साल पुरानी हैं। जबकि नेशनल फायर एडवाइजरी कमेटी के मुताबिक एक दमकल की लाइफ 10 साल होती है। अपनी उम्र पूरी करने वाली दमकलों को फायर ब्रिगेड से हटा दिया जाता है। लेकिन यहां अभी भी वर्ष 1980 में खरीदी गईं दमकलों से आग बुझाई जा रही है।

जिन गाड़ियों के भरोसे नगर निगम शहर में फायर सेफ्टी का दावा करता है, वह दुर्घटना के वक्त स्टार्ट ही नहीं होतीं। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, जब गाड़ियां स्टार्ट ही नहीं हुईं।

इन अग्नि दुर्घटनाओं में आग पर काबू तो पाया, पर सामान नहीं बचा पाए

नवंबर 2013 – विंध्यांचल भवन के ग्राउंड फ्लोर, अरेरा हिल्स

जून 2015 – पंचानन भवन के ग्रांउड और मेजानाइन फ्लोर, मालवीय नगर

अक्टूबर 2015 – विंध्याचल भवन की चौथी मंजिल

नवंबर 2020 – पंचानन भवन की छठवीं मंजिल

नवंबर 2021 – कमला नेहरू अस्पताल की तीसरी मंजिल

जनवरी 2023 – पर्यावास भवन की तीसरी मंजिल

कितना मजबूत है शहर का अग्निशमन अमला

फायर एक्सटेंग्यूशर – 90

जनरेटर – 1

हाइड्रोलिक प्लेटफार्म – 2 (70 और 171 फीट)

फोम टैंडर – 6

फायर फाइटर छोटे-बड़े – 26

एम्बुलेंस एवं शव वाहन – 10

डिवाटरिंग पंप छोटे-बड़े – 24

ब्रीथिंग एप्रेटस सेट – 6

फायर सूट – 10

रिकवरी वैन – 1

क्रेन – 1

शा कटर – 1

लाइफ जैकेट – 6

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