चिंकी नामक कुते ने पेश की वफादारी की मिसाल,अपनी जान गंवाकर बचाई मालिक की जान
मधुबनी जिले में एक आश्चर्यजनक व मार्मिक घटना प्रकाश में आई है!चिंकी नामक पालतू कुते ने वफादारी की मिसाल कायम करते हूए अपनी जान गंवाकर मालिक की जान बचाई है!
मामला नगर निगम क्षेत्र के रांटी गांव का है जहाँ भवन निर्माण सामग्री व्यवसाई आदित्य सिंह अपनी पत्नी व बेटी के साथ रहते है!
आदित्य सिंह ने बताया की बीती रात करीब करीब 10:00 बज रहे था लाइट कटी हुई थी!मैं बाहर में अपने परिसर में कुर्सी पर बैठा हुआ था!दोनों पैर टेबल पर रख कर आराम फरमा रहा था।एकाएक कहीं आस पास से फुफकारने की आवाज आई तो मै चौकन्ना हो गया!तत्काल मैंने टॉर्च जलाया और चारों तरफ देखा तो कहीं कुछ नजर नहीं आया।थोड़ी देर बाद फिर से वैसा ही फुफकारने की आवाज सुनाई देने लगा।पुनः मैं टॉर्च लेकर देखा तो मेरे सामने करीब पांच फीट लंबा गेहूमन सांप फन काढ़े फुफकार रहा था!मैं घबरा कर अपनी पत्नी को आवाज लगाया!वहीं एक डंडा लेकर सांप को भगाने की कोशिश कर ही रहा था कि मेरी चिंकी मेरी जान आफत में देखकर सीधा सांप के ऊपर छलांग लगा दी और उसके फन को पकड़ कर झकझोरने लगी!सांप चिंकी से लिपट का उसको भी जकरने लगा! मैने बचाने की बहुत कोशिश किया,लेकिन दोनो एक दुसरे से करीब 2-3 मिनट तक द्वंद करता रहा।मै लगातार कोशिश किया कि सांप भी बच जाए और मेरा कुत्ता भी सुरक्षित रहे,लेकिन ऐसा नहीं हो सका!मेरा कुत्ता उस सांप को मर जाने तक झकझोरता रह गया जब तक सांप मर नहीं गया!सांप के मर जाने के बाद कुत्ता वहीं पर थक कर बैठ गया!मैं कुता के पास गया तो देखा की कुत्ते के मुंह से खून आ रहा था और शरीर में भी कई जगह सांप के काटने का निशान था!मैंने डॉक्टर को फोन किया डॉक्टर दवा बता रहे थे की इतने ही देर में चिंकी वहीं पर लेट गई और मुंह से झाग निकलने लगा! मैं घबरा के स्कूटी पर ले जाने के लिए तैयार हुआ तब तक पता चला वह मर चुकी है।वह मेरी जान बचाते हूए अपने प्राणों की आहुति दे दी।उन्होंने बताया की आज तक यह कहानी सिर्फ फिल्मों में देखा करता था! कहानियों में सुना था। लेकिन मेरे खुद के ऊपर गुजरी तो मुझे लगा के इंसान उसकी वफादारी के सामने कहीं भी नहीं है हम उसे कुत्ता बोलते हैं जो शब्द अपने आप में एक गाली की तरह होता है लेकिन आज यह साबित हो गया कि कुत्ता शब्द गाली नहीं होता है कुत्ता अगर एक रोटी खाता है तो खिलाने वालों को अपनी पुरी जिंदगी भर याद रखता है! और अपने मालिक के ऊपर कोई मुसीबत आता देखकर अपने जानों की बाजी लगा देता है।वह मेरा कुत्ता नहीं परिवार का सदस्य था!
वह मुझे व मेरे परिवार को सुरक्षित रखने के क्रम में वह अपनी जान से हाथ धो बैठा। मैं उसका ऋण जीते जी नहीं चुका सकता हूँ!
आपको बता दे की चिंकी नामक कुते को आदित्य सिंह चार सालो से पाल रहा था!घर में वह एक परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था!उसकी इस तरह जान जाने से परिवार के लोग बुरी तरह गमगीन है!आदित्य सिंह की बेटी जो चिंकी से काफी लगाव रखती थी वह तो बिल्कुल शांत और मायूस है!