एक बढ़ा रहा हाथ तो दूसरा दिखा रहा डर, इस बार भूमिहार वोट बैंक के लिए खेल बहुत बड़ा है
पटना बिहार में भूमिहार वोट बैंक को लेकर हाल के दिनों में गजब की सियासत परवान चढ़ी है। खासतौर पर बोचहां में आरजेडी की जीत के बाद इस वोट बैंक पर हर पार्टी की नजर गड़ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में भूमिहारों का वोट करीब 6 फीसदी के आसपास है। लेकिन इस वोट बैंक की ये खासियत है कि जब भी ये किसी पार्टी को जाता है तो एकतरफा जाता है। यानि इस वोट बैंक में सेंध की न के बराबर गुंजाइश होती है। लिहाजा कभी गरीब सवर्णों के आरक्षण के खिलाफ जाने वाले आरजेडी के युवराज तेजस्वी यादव को अब परशुराम जयंती से भी कोई परहेज नहीं रह गया। वो पिता के उलट अपनी खींची नई लकीर पर चल रहे हैं। उधर तेजस्वी के इस दांव से बीजेपी के खेमे में जबरदस्त खलबली है। क्योंकि उसने हाल के 5 सालों में जिस वोट बैंक को फॉरग्रांटेड यानि अपनी विरासत समझ ली वो एक झटके में दरक गया।
तेजस्वी बढ़ा रहे दोस्ती का हाथ
तेजस्वी यादव ने बोचहां चुनाव परिणाम के बाद करीब-करीब ये तय कर लिया है कि वो सवर्ण वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। भले ही वो पार्टी की पुरानी लाइन से उलट ही क्यों न हो। तेजस्वी को उम्मीद है कि उनका नया समीकरण उन्हें सत्ता तक पहुंचा देगा। इसके लिए मेहनत बस इतनी करनी है कि जहां जाएं वहां A to Z की बात करें। पटना में मंगलवार की परशुराम जयंती में तेजस्वी के इस बयान पर गौर कीजिए। परशुराम जयंती पर तेजस्वी ने भरे मंच से कहा ‘हमारी कोशिश है कि सब भाई साथ चलें और बिहार को भी अन्य राज्यों की तरह विकसित बनाएं। ब्राह्मण-भूमिहार समाज जागरूक है। ज्ञान और शिक्षा का प्रतिबिंब है। देश-प्रदेश में इतनी महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी व्याप्त है। आप लोग भी बीड़ा उठा लीजिए यकीन मानिए सफलता मिलेगी