ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

केरल के कम्युनिस्टों का विचित्रसाम्यवाद !

केरल में वर्तमान में कम्युनिस्टदल की सरकार है । 1956 में भारतीय संघराज्य का केरल यहस्वतंत्र राज्य अस्तित्व में आया और 1957 में केरल में पहली लोकतांत्रिक सरकार कम्युनिस्ट दल की बनी। आज राज्य निर्मिति के 65वर्षों के उपरांत ‘कम्युनिस्ट’केरल का मार्गक्रमण कैसा हो रहा है, यह बताने वाला यात्रा का अनुभव…

केरल के कम्युनिस्टों के प्रेरणास्रोतकौन ?

केरल में ‘मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल’ का राज्य है । नाम के अनुसार ही दल की प्रेरणा ‘कार्लमार्क्स’ है। हमारे देश में लोकतंत्र है और निर्वाचन द्वारा राजनीतिक दल सत्तारूढ होते हैं। संपूर्ण संसार के कम्युनिस्टों का इतिहास देखने पर वे निर्वाचनों का सामना नहीं करते। ‘किसान और परिश्रम करने वालों केरक्तरंजित विद्रोह से सत्ताका मार्ग निकलता है’, इस कम्युनिस्ट तत्त्वज्ञान पर उनकी श्रद्धा होती है । इसलिए 1957 तकसंसार की एक भी कम्युनिस्टसरकार निर्वाचन में विजयीहोने के उपरांत सत्तारूढ नहींहुई थी; परंतुकेरल में 1957 मेंवहां की पहली विधानसभा केनिर्वाचन में कम्युनिस्ट दलविजयी होकर सत्तारूढ हुआ ।केरल में इस दल की विशेषताएंहैं वहां के स्थानीय नेता अथवादल के राष्ट्रीय नेताआें कीछवि उनकी प्रसार सामग्रीअर्थात बैनर्स-पोस्टर्सपर नहीं होती । कांग्रेस कीप्रचार सामग्री पर गांधीजीसे लेकर राहुल गांधी तक सबकेछायाचित्र दिखाई देते हैं ।भाजपा की सामग्री पर भी अटलजीसे लेकर अमित शहा तक सबकेछायाचित्र होते हैं । इस पृष्ठभूमि पर केरल के कम्युनिस्टोंकी पृथकता अधोरेखित होती है। उनकी प्रचार सामग्री परसंपूर्ण संसार के कम्युनिस्टक्रांति करनेवाले तीन नेताओंके चित्र होते हैं । पहला चित्रअर्जेटीना के कम्युनिस्टक्रांति के युवानेता ‘चेगवारा’ केविविध पोस्टर्स का है। दूसरा चित्र रंग से पोती गई दीवारका है। उस पर ‘कार्लमार्क्स’, ‘फेड्रिकएंगल’ और ‘व्लादिमिरलेनिन’ के एकत्रित छाया चित्र हैं। ऐसे पोस्टर्स और पोती गई दीवारें को चीन-एर्नाकुलमनगर में सर्वत्र दिखाई देते हैं तथा उनके साथ ही दिखाई देते हैं मार्ग के पथदीपकोंऔर विद्युत वाहिनियों के स्तंभों पर लगे कम्युनिस्ट पार्टी के हंसिया-हथोडे के चिन्ह वाले झंडे !

संक्षेप में स्वतंत्रता के 75वर्षों के उपरांत भी राष्ट्रीय विज्ञापन के लिए कम्युनिस्ट दल को नेता के रूप में आदर्श व्यक्तित्व नहीं मिला है। इसीलिए विदेश के जर्मनी-रशिया-अर्जेंटीना के नेताआें के चित्र लगाने में वह आज भी धन्यता मानता है। दुर्भाग्यवश यह अराष्ट्रीयता है ।

‘गल्फमनी’ यह बडा आर्थिक स्रोत !
भारत की कुल बेरोजगारी दर की अपेक्षा केरल की बेरोजगारी दर अत्यधिक है। यद्यपि वहां साक्षरता 100 प्रतिशत है, तथापि उद्योग धंधे अत्यल्प हैं;क्योंकि कोई उद्योग प्रारंभ होते ही वहां तुरंत कम्युनिस्ट दल केनाम के यूनियन के झंडे लग जाते हैं। ‘कामकम और मांगे अधिक’ ऐसी उनकी गुंडागर्दी होती है। ऐसी स्थिति में उद्योग खडे नहीं होते। इसलिए शिक्षित केरलवासियों को नौकरियांनहीं मिलतीं । अधिकांश शिक्षित केरली लोग खाडी (गल्फ) देशोंं में नौकरियां स्वीकारते हैं। खाडी देशों में केरली लोगप्रमुखता से परिचारिका (नर्स), वाहनचालक(ड्रायव्हर), तंत्रज्ञ (टेक्निकलस्किल्ड लेबर) आदिकाम करते हैं । उनकी विदेशयात्रा सरल होने के लिए छोटे से केरल में 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। आज 35लाखकेरली लोग खाडी देशों में रहते हैं। उनके कारण विदेशी आयकेरल राज्य को मिलती है औरवहां की अर्थव्यवस्था चलती है। उद्योगधंधे बडी मात्रा में न होकर भी विदेशी आय के भरोसे केरल राज्य की अर्थव्यवस्था बनी हुई है। उसमें केरल के कम्युनिस्टों का योगदान शून्य है।

नीलेवस्त्रों के कुलियों कीगुंडागर्दी !
कोचीन-एर्नाकुलमनगर में सर्वत्र नीले वस्त्रपरिधान किए हुए कुली दिखाईदेते हैं। इन लोगों को ‘नोक्कूकुली’ कहते हैं । किसी भी व्यापारी वाहन का सामान उतारना हो, तो उन्हें बुलाना पडता है । हम स्वयं उतारनेवाले हों, तबभी उनको उनका मूल्य देना पडता है। मालिक उन्हें देखे, तब भी उनका मूल्य वे जो मांगेगे,वह देने की ‘कम्युनिस्ट’कुप्रथा वहां है। अनेक सुशिक्षित युवकों की टोली नीले रंग के कुली के वस्त्र परिधान कर शहर में घूमती रहती है और पैसे वसूल करती रहती है। कम्युनिस्टदल का समर्थन होने के कारण कोई उनका विरोध नहीं करता। कम्युनिस्टों का राज्य कैसा होता है, इसका यह ज्वलंत उदाहरण है।

केरलमें कम्युनिस्टों का एकाधिकार !
केरल के अधिकांश हिन्दू कम्युनिस्टदल को मत देते हैं । एक सामान्यघर के हिन्दू मतदाता से मैंनेपूछा, आपकम्युनिस्ट दल को मत क्योंदेते हैं ? उसनेबताया कि, मृत्युके पश्‍चात यहां कंधा देनेके लिए लोग नहीं होते। अंतिमसंस्कार कौन करेगा,यहप्रश्‍न होता है। ऐसे समयकिसी के घर में मृत्यु होनेपर स्थानीय कम्युनिस्ट दल के कार्यालय से अर्थी और अंतिमसंस्कार की सामग्री आती है। दल के कार्यकर्ता स्वयं कंधा देकर श्मशान भूमि तक पहुंचाते हैं। ऐसा और कौन करता है ? उसके प्रश्‍न का उत्तर मेरे पास नहीं था । केरल के हिन्दू स्वयं को श्मशानभूमि तक ले जाने के लिए कम्युनिस्ट दल को मत देते हैं, इतना उनके बोलने से ज्ञात हुआ।

Leave A Reply

Your email address will not be published.