BKU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत बोले सरकार आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही
मेरठ: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैतभारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैट ने कहा देश के हालात श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे होते देर नहीं लगेगी। सरकार किसान आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। किसानों को अपने हक की लड़ाई लड़ने का अधिकार है। किसान अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन सरकार किसी भी मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार नहीं है।खरीफ फसलों की एमएसपी किसानों से छलावाकिसान नेता और BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश टिकैत जो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बृहस्पतिवार सुबह उन्होंने एक बार फिर एमएसपी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने खरीफ की फसलों के एमएसपी में मामूली वृद्धि कर किसानों के साथ फिर धोखा किया है। धान के लिए मात्र 100 रुपये की वृद्धि मजाक है। तिलहन और दलहन की भी यही स्थिति है।फसलों की बुवाई लागत 25 प्रतिशत महंगी हुईनरेश टिकैत ने आगे कहा कि पिछले दो सालों में रबी और खरीफ की फसलों की बुआई की लागत में 20 से 25 फीसदी वृद्धि हुई है। यह वृद्धि डीजल, खाद, कीटनाशक, बीज, मजदूरी में बढ़ोतरी की वजह से हुई। भाकियू की पहले से मांग है कि सी 2+50 के फार्मूले से एमएसपी गारंटी कानून जब तक नहीं बनेगा तब तक किसानों ही आर्थिक हालत सुधरने वाली नहीं है।एमएसपी गारंटी कानून पर कमेटी बनाने का आश्वासन देकर केंद्र सरकार ने अभी तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। केंद्र सरकार किसानों से वादाखिलाफी कर रही है।गेहूं की बिक्री पर छूट देकर देख लियागेहूं की खुले में बिक्री की छूट देकर सरकार ने देख लिया कि प्राइवेट प्लेयर्स के आने से न किसानों को लाभ मिला और सरकार के गोदाम खाली रह गए। मौसम ने अगले सीजन में साथ नहीं दिया तो देश खाद्यान्न संकट का सामना करने पर मजबूर होगा। महंगाई बढ़ेगी और हालात श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे होते देर नहीं लगेगी। किसानों को हर हाल में लाभकारी मूल्य देना ही सरकारों के पास एकमात्र विकल्प है।हरियाणा के बराबर बिजली का रेट कर दोनरेश टिकैत ने कहा कि देश का सभी को फिक्र है। हम किसी भी कीमत पर टकराव नहीं चाहते। ट्यूबवेल पर बिजली मीटर लगाकर किसान तो कर्ज के नीचे दब जायेंगे म्हारी मांग है की खेती की बिजली का रेट हरियाणा की बिजली के रेट के बराबर कर दो।फिर आंदोलन करने की हमें कोई जरूरत नहीं। आंदोलन तो सरकार की शोभा है। सरकार वार्ता करे तो समस्या का हल निकलेगा। किसान तो अपनी मांग रखेगा ही। जोर जबरजस्ती से आंदोलन को दबाने का प्रयास किए तो वह ठीक नहीं।
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