चंडीगढ़ के पहलवान सोनू ने दिलाया नेशनल रेसलिंग के 130 किलोग्राम वर्ग में मेडल, अब सभी गर्व करते हैं
चंडीगढ़: सोनू‘इतना वजन कर रखा है, डराएगा क्या’ ये वे शब्द थे, जो सोनू आए दिन स्कूल में साथियों से सुनते थे। तब कोई नहीं जानता था कि यही ओवरवेट और ओवरसाइज सोनू चंडीगढ़ की पहचान बनेगा। अंडर-23 नेशनल रेसलिंग चैम्पियनशिप में सोनू ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। ग्रीको रोमन की हेवीवेट कैटेगरी 130 किलोग्राम में यह मेडल हासिल किया। कभी वजन के कारण दोस्त मजाक उड़ाते थे, आज उसी सोनू पर गर्व करते हैं। वे मनीमाजरा कोचिंग सेंटर के ट्रेनी हैं और कोच दर्शन लाल ने उन्हें तैयार किया है।सोनू ने भास्कर से बात करते हुए कहा कि स्कूल में दोस्त मेरे मोटेपा का मजाक उड़ाते थे। ऐसी बातें मैं रोज सुनता जरूर था, लेकिन कभी ये बातें खुद को बुरी नहीं लगने दी। इन बातों को दिमाग में रखते हुए ही 2015 में कुश्ती शुरू की। मेरे पिता गेम को पसंद करते हैं और चाचा ने तो कुश्ती की है।अंडर-100 से की शुरुआतसोनू ने कहा कि मेरा वजन शुरू से ही ज्यादा था और कभी लोगों की बातें सुनकर ये नहीं सोचा कि वजन कम करना है। सोचा यही कि अच्छे से खाना है और अच्छे से मेहनत करनी है। इसीलिए मैं कुश्ती सीखने लगा। अंडर-100 कैटेगरी से शुरुआत की थी और इसके बाद मैं 110 किलोग्राम वर्ग में खेला। अब मेरा वजन 124 किलो है तो मैं 130 किलोग्राम वर्ग में कुश्ती कर रहा हूं। इसी वर्ग में मेरा टारगेट एशियन चैम्पियनशिप और वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मेडल जीतना है।लिगामेंट टूटा लेकिन हौसला नहींहर पहलवान के करियर में चोट जरूर होती है और सोनू का भी करियर इससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि 2018 में नेशनल के दौरान मेरा लिगामेंट ब्रेक हो गया था। मैं चल नहीं पा रहा था। एक साल तक मुझे मैट से दूर रहना पड़ा और 2019 में मैंने कमबैक किया। कुछ ही महीने की ट्रेनिंग के बाद मैंने एशियन कैडेट रेसलिंग में देश के लिए मेडल जीता। इस दौरान पसंदीदा पहलवान रजा (तुर्की) की वीडियो देखी। वे मुझे हर कदम पर मोटिवेट करते रहे हैं। वे ही मेरे रोल मॉडल हैं।सुबह 4 बजे शुरू होता है दिनसोनू का दिन सुबह 4 बजे शुरू होता है और वे सबसे पहले आंवला या केला खाते हैं। इसके बाद ट्रेनिंग करते हैं और बीच में मनके का पानी या फिर ग्लूकोज लेते हैं। प्रैक्टिस के बाद वे 250 ग्राम बादाम का पानी पीते हैं, फिर नाश्ते में दलिया खाते हैं और दूध पीते हैं।इसके बाद रेस्ट और फिर 12 बजे रोटी, सब्जी, दही और सलाद के साथ लंच करते हैं। शाम को अभ्यास के समय फिर से मनके का पानी या ग्लूकोज और फिर अभ्यास के बाद बादाम का पानी या प्रोटीन। रात के खाने में फिर से रोटी-सब्जी, सलाद लेते हैं और फिर 10 बजे तक सो जाते हैं। सुबह फिर 4 बजे दिन शुरू होता है।
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