सिविल अस्पताल में ना दवाइयां ना इलाज, रेफरल युनिट बना, मरीजों को भेजा जा रहा अमृतसर
जालंधर: सिविल अस्पताल जालंधर से अमृतसर के लिए रेफर अपने बच्चे को लेकर एम्बुलेंस में बैठी गरीब महिलाबेशक पंजाब के सबसे बड़े सिविल अस्पताल जालंधर को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन यहां धरातल पर सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। इस अस्पताल में ना मरीजों को दवाइयां मिलती हैं और ना ही इलाज। गंभीर मरीज आने पर तो उसे तुरंत अमृतसर मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद दावा यह किया जा रहा है कि लोगों को सरकारी अस्पतालों में सारी दवाइयां मिल रही हैं। जबकि हकीकत यह है कि महिला की प्रसूति होने पर स्टाफ दवाइयों की एक लंबी फेहरिस्त परिजनों के हाथ में थमा देता है। उन्हें कहा जाता है कि बाहर से जाकर ले आओ।गंभीर मरीज के आने पर तो सिविल अस्पताल में ह़ड़बड़ी मच जाती है। आक्सीजन का प्रॉपर प्रबंध ना होने का बहाना लगाकर पेशेंट को मेडिकल कालेज अमृतसर के लिए रेफर कर दिया जाता है। पिछली रात भी एक बच्चा सीरियस कंडीशन लेकर मां-बाप जब अस्पताल में पहुंचे तो एक रात्रिकालीन स्टाफ ने बच्चे का इलाज करने बजाय सीधे उसे अमृतसर रेफर कर दिया। बोला गया कि उनके पास आक्सीजन का प्रबंध नहीं है।बच्चे के मां-बाप ने कहा कि वह बहुत गरीब है। सिविल अस्पताल में इसलिए ही आए थे कि उन्हें इलाज मिल जाएगा। लेकिन किसी ने भी उनके बच्चे की सुध नहीं ली। इसी तरह से एक अन्य तीमारदार ने बताया कि उनकी पत्नी की प्रसूति हुई है। अस्पताल के स्टाफ ने दवाइय़ों की एक लिस्ट उसे थमा दी है। उन्होंने कहा कि बाहर से सात हजार रुपये का सामान खड़ें पांव उसे लाकर देना पड़ा।एम्बुलेंस के चालकों ने भी बोला कि मरीजों को यह कहकर अमृतसर रेफर कर दिया जाता है कि वहां पर आपका सारा इलाज फ्री है। लेकिन जब मरीजों को वहां पैसे खर्च करने पड़ते हैं तो वह गालियां निकालते हैं। यह सब उन्हें मौके पर सुनना पड़ता है। मरीजों को लेकर जाने वाली 108 एम्बुलेंस चालकों ने बताया कि सिविल अस्पताल जालंधर की हालत यह है कि वह अभी एक मरीज को अमृतसर छोड़कर वापस पहुंचते ही हैं कि उन्हें दोबारा फिर से अमृतसर के लिए भेजा जा रहा है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों की निजी अस्पताल वालों से साठगांठ है। यदि कोई मरीज पैसे खर्च करने वाला हो तो उसे निजी अस्पताल में भेज देते हैं और यदि कोई मरीज गरीब हो तो उसे अमृतसर रेफर कर दिया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की है कि यदि अस्पताल में मरीजों का इलाज ही नहीं है। यहां पर दवाइयों का प्रबंध नहीं है तो फिर ऐसे अस्पताल का कोई फायदा नहीं है। इसे बंद कर देना चाहिए। इतना अस्पताल मात्र रेफरल यूनिट बना हुआ है।बच्चे के साथ आई महिला से बहस करती डॉक्टरअस्पताल में सुविधा नहीं हैं तो सरकार से पूछोअस्पताल में देर अपने गंभीर बीमार बच्चे को लेकर अस्पताल में पहुंची मां ने जब महिला डाक्टर से कहा कि इसका इलाज करो तो आगे से जवाब मिला कि इसे वैंटिलेटर की ज़रुरत है। महिला ने डॉक्टर से कहा कि इतना बड़ा अस्पताल है तो क्या यहां पर वैंटिलेटर नहीं है। इस पर डॉक्टर ने भड़कते हुए कहा कि वह भी यहां नौकरी करती है। वैंटिलेटर घर से लेकर नहीं आउंगी। अस्पताल में सुविधाएं नहीं है तो इसके बारे में सरकार से बात करो या फिर अस्पताल प्रशासन से बात करो।
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