भागवत कथा पोथी या कहानी नहीं है, भगवान को कर्मयोगी पसंद है – भाग्य के भरोसे नहीं बैठे
खरगोन: जिले के भीकनगांव क्षेत्र के कोदला जागीर में प्रखांड कथाकार पं. कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुर की कथा चल रही है। कथा में छठे दिन गुरुवार को उन्होंने कहा कि भागवत कथा पोथी या कहानी नहीं है। यह साक्षात श्रीकृष्ण है। गौमाता के गोबर में लक्ष्मी का वास होता है। जिस घर में गौपालन होता है वहां कभी धन का अभाव नहीं रहता। यह बात पं. शास्त्री ने कही। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को करो का भुगतान प्रत्येक व्यक्ति ने देना चाहिए। जिससे राष्ट्र उन्नित करता है। कथा के दौरान उन्होंने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया।पश्चिमी देशों की सारी गंदगी टीवी और मोबाइल में आ रही हैकथा के दौरान पं. शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में पश्चिमी देशों की सारी गंदगी टीवी और मोबाइल में आ रही है। इससे बच्चों को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहंकार ईश्वर का आहार है। विनम्रता होनी चाहिए। अपने आप को तिनके से भी छोटा समझों, सहिष्णु बनो।कथा में बड़ी संख्या में पहुंची श्रोतागणकर्म से जीवन का निर्माण होता है कर्मयोगी बनोकथा के दौरान पं. शास्त्री ने बताया कि कर्म से ही जीवन का निर्माण होता है। भाग्य के भरोसे रहने वाले मुर्ख और आलसी है। भगवान को कर्मयोगी पसंद है। कर्म ही भाग्य है। आप अपने कर्म से अपने भाग्य को बदल सकते हो। जो कर्म में निष्ठा रखता है। वहीं कर्मयोगी है।कथा में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रोतागणप्रकृति पूजन है गोवर्धन पूजाकथा में गुरुवार को पं. शास्त्री ने गोवर्धन पूजा का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि गोर्वधन पूजन असल में प्रकृति पूजन है। क्योंकि हमें गोवर्धन के माध्यम से ही प्रकृति पूजन करते है। उन्होंने बताया कि हमें हवा का पूजन अधिक से अधिक पौधे लगाकर कर सकते है। जल का पूजन उसे निर्मल बनाकर। उसमें गंदगी न डालकर उसे निर्मल बनाकर कर सकते है। कथा का समापन भगवान की गोवर्धन की आरती और भगवान का छप्पन भोग लगाकर हुआ। कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
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