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अन्य सभी राज्यों को पछाड़ता बिहार का ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’: जदयू

पटना। जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा एवं सुश्री आनुप्रिया ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सभी वर्गों के स्वरोजगार के लिए शुरू की गई ‘‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’’ कई मामलों में पूरे देश में अपने तरह की एक मात्र योजना है। किसी-किसी राज्य में तो स्वरोज़गार ऋण योजना पाने के लिए लाभार्थी को अपने खाते में मोर्टेज राशि रखना आवश्यक होता है लेकिन बिहार में लाभार्थी से ऐसी कोई माँग नहीं की जाती है।

प्रवक्ताओं ने कहा कि इस योजना के तहत पिछले वर्ष हजारों लोगों को दस लाख रुपए प्रति लाभार्थी के अनुसार स्वरोज़गार ऋण दिया गया और अब इस योजना के दूसरे चरण के लिए नामांकन शुरू हो रहा है जिसमें लगभग आठ हज़ार लोगों को स्वरोज़गार ऋण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा सभी वर्गों के स्वरोजगार के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री उद्यमी योजना पूरे देश में एक मात्र ऐसी योजना है, जो एसटी-एससी, पिछड़ा व अति पिछड़ा, महिला वर्ग के दो-दो हजार एवं सामान्य वर्ग के एक हजार युवा लाभार्थियों के लिए आरक्षित है। इसके अलावा 500 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए भी इस योजना में आरक्षण है।

प्रवक्ताओं ने आगे कहा कि बिहार पूरे देश में एक मात्र ऐसा राज्य है जहां हर वर्ष उद्यमी योजना में चयनित लाभार्थीयों को दस लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अन्य राज्यों में लाभार्थियों की ना तो कोई निश्चित संख्या है और ना ही उनके लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान है। पूरे देश में बिहार अकेली ऐसी सरकार है जिसके द्वारा मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत दी जाने वाली दस लाख की आर्थिक सहायता सीधे राज्य सरकार द्वारा लाभार्थी के खाते में दी जाती है, जबकि अन्य राज्य सरकारें इस तरह की योजनाओं में थर्ड पार्टी के रूप में होती है। अन्य राज्य सरकारें बैंको के द्वारा लाभार्थी को ऋण उपलब्ध करवाती हैं और ऋण पर अनुदान देती है। बिहार एक मात्र ऐसा राज्य है जो इस योजना के तहत हर वर्ग के लाभार्थियों को आधी राशि यानि 5 लाख रूपये का निश्चित अनुदान दे रहा है और लाभार्थी को शेष राशि की वापसी किस्तों में 5,952 रूपये प्रतिमाह 84 महीनों में वापस करने का प्रावधान है, जबकि अन्य राज्यों में स्वरोजगार की योजनाओं में मात्र 15 से 30ः तक अनुदान का ही प्रावधान है और राशि वापसी की समय सीमा तय करने का अधिकार बैंको को दिया गया है।

प्रवक्ताओं ने बताया कि बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में दो किस्तों में मिलने वाले दस लाख रूपये प्राप्ति के 12 महीने के बाद वापसी की किस्त शुरू होती है, जबकि अन्य राज्यों में राशि मिलते ही किस्त लौटाने की प्रतिबद्धता होती है। यही नहीं महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को इस योजना के तहत ब्याज मुक्त सहायता का प्रावधान किया गया है। उधर अन्य राज्य सरकारें ऋण की राशि पर मोटा ब्याज लगाती है या फिर ब्याज लगाने का अधिकार बैंकों को दे देती है। उत्तर प्रदेश ने ब्याज तय करने का अधिकार बैंकों को दिया है, जबकि मध्य प्रदेश, आसाम और हरियाणा ने इस ऋण पर क्रमशः 6ः, 5ः और 7ः ब्याज तय किया है। दूसरी ओर बिहार में सामान्य वर्ग के यूवाओं से भी मात्र 1ः ब्याज लिया जाता है। इसके अलावे चयन के उपरांत लाभुकों के प्रशिक्षण के लिए प्रति इकाई 25,000ध्- की व्यवस्था की गयी है साथ ही इन इकाइयों को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन निति 2016 का लाभ भी मिलता है।

प्रवक्ताओं ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही उद्यमी योजना का लाभ लाभार्थी के पास बगैर पूंजी रहे ही मिल जाता है, जबकि अन्य राज्यों में एक न्यूनतम पूंजी राशि का होना अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश में सामान्य वर्ग के लाभार्थी के पास ऋण का 10ः और आसाम में कम से कम कुल ऋण का 15ः पूंजी होना जरूरी है। ब्याज मुक्त और बेहद ही आसान किस्तों में आधी रकम की ही वापसी का प्रावधान स्वरोजगार करने वालों के लिए बिहार सरकार द्वारा चलाया जा रही यह योजना काफी फायदेमंद है। साथ ही आधी आबादी के सशक्तिकरण की एक मिसाल कायम करते हुए बिहार सरकार द्वारा इस योजना में महिलाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

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