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573 मीटर ऊंची पहाड़ी पर रोकी पेड़ों की कटाई, अब इस पहाड़ी पर हरे-भरे हैं डेढ़ लाख से ज्यादा पेड़

गुना: गुना जिले में सबसे ऊंची हीरापुर की पहाड़ी पर 20 साल से पेड़ों की कटाई रोक रहीं सुरुती बाई, रोज करती हैं गश्त। हीरापुर इलाके में तीन साल में अवैध कटाई का सिर्फ एक केस दर्ज हुआ।एक तरफ जहां जंगल साफ होते जा रहे हैं, वहीं गुना जिले में एक आदिवासी महिला ने पेड़ों को बचाने के लिए अपना जीवन लगा दिया। हीरापुर गांव में रहने वाली सुरुतीबाई 20 साल से पेड़ों का रक्षा कर रही हैं। सुरुतीबाई की पहल और निडरता से आज गुना में सबसे ऊंची (573 मीटर) हीरापुर पहाड़ी हरी-भरी है। इस क्षेत्र के बीट गार्ड इमरान मियां बताते हैं साल 2000 में इस पहाड़ी पर निरंतर पेड़ों का कटाई जारी थी। पहाड़ी वीरान हो चुकी थी। गिने चुने पेड़ ही बचे थे। जंगल माफिया सक्रिय थे, लोगों में उनका खौफ था।जंगल में शिकारी कटाई के साथ जानवरों का शिकार भी करते थे। गांव की सुरुती बाई ने जंगल को बचाने के लिए अन्य गांव वालों को भी जागरूक किया। पहले गांव की पांच महिलाओं की टीम बनाकर पहाड़ी पर गश्त शुरू की। फिर धीरे-धीरे पुरुष भी इस मुहिम में जुड़ते चले गए। कटाई रुकने के बाद आज इस पहाड़ी पर करीब डेढ़ लाख से ज्यादा पेड़ हरे-भरे हैं। सुरुती बाई की इस निडरता को देखते हुई 2003 में वन विभाग ने उन्हें वन समिति का अध्यक्ष बनाया। सुरुती बाई ने गांव से ही 10 अन्य सदस्यों को इस समिति से जोड़ा। अब पूरा गांव हीरापुर की पहाड़ी की रक्षा करता है।पहाड़ी पर 50 लाख से ज्यादा का सागौन, दो साल में चार लाख रुपए तक का बांस निकलता हैगुना दक्षिण रेंज के रेंजर विवेक चौधरी बताते हैं कि हीरापुर की पहाड़ी पर सीसम, सागौन, नीम, चिरोल, गुर्जन, कंजी, आंवला, चिरौंजी, तेंदू, बेलपत्र, इमली सहित कई प्रजाति के हरे-भरे पेड़ हैं। यह सब पेड़ों की कटाई रुकने से ही संभव हुआ। पहाड़ी पर वर्तमान में सौगान के पेड़ों की कीमत 50 लाख रुपए आंकी गई है। कटाई योग्य पेड़ों की मार्किंग कर उन्हें नीलाम किया जाएगा, वहीं हर दो साल में इस पहाड़ी से चार लाख तक के बांस निकलते हैं। इनसे जो कमाई होती है, वह वन समिति के खाते में जमा कर दी जाती है। रेंजर विवेक ने बताया इस इलाके में तीन साल के दौरान अवैध कटाई का सिर्फ एक ही केस दर्ज हुआ है।

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