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सरकार सिर्फ छात्रों के सपनों नहीं बल्कि मजबूरियों को भी कुचल रही : मनोज शर्मा

पटना। इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मगध में समाधान यात्रा कर है लेकिन, एक भी मुद्दे का समाधान नही कर पा रहे है।  बिहार में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। ज्ञान की धरती कहे जाने वाले मगध में युवा और बच्चे क्वालिटी शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उच्च कोटि की शिक्षा के लिए लड़ रहे स्टूडेंट्स जब पेपर लीक के विरोध में आवाज उठाते हैं तो उनपर डंडे बरसाए जाते हैं। मगध विश्वविद्यालय में तीन साल की ग्रेजुएशन की डिग्री 7 साल में भी नहीं मिल पाती है। लेकिन, सरकार अभी भी गहरी नींद में सोई हुई है। जब श्री नीतीश कुमार के समाधान यात्रा के समय ये पूछा जाता है कि मुख्यमंत्री का जबाब लाचारी भरा होता है। वो कहते कि “शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कोशिश किया जा रहा है। यहां कॉलेज और यूनिवर्सिटी की स्थिति ठीक नहीं है। हमने राज्यपाल से इस पर नजर बनाने के लिए कहा है। नीतीश कुमार भी मगध से आते है लेकिन, मगध में ही छात्रों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। छात्रों ने हाथ में पोस्टर ले रखा था जिसमें लिखा था ‘आइए ना हमरा बिहार में तीन साल की डिग्री देंगे 7 साल में’। चार साल होने वाला है लेकिन अभी तक पार्ट-1 का रिजल्ट भी नहीं आया। वैकेंसी आ रही है लेकिन छात्र फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। सरकार छात्रों के सपनों को कुचलने का काम कर रही है। सिर्फ छात्रों के सपनों को नहीं कुचला जा रहा है बल्कि मजबूरियों को भी कुचला जा रहा है। छात्र गांव से आते हैं और उनके मां-बाप बहुत मुश्किलों से पैसे भेजते हैं। छात्र मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। बिहार में शिक्षा व्यवस्था कहां जा रही है किसी को पता नहीं है।  जब से नीतीश सरकार आई है पता नहीं शिक्षा व्यवस्था कहां जा रही है। बिहार में शराब और जातीय जनगणना मुद्दा है बस शिक्षा मुद्दा नहीं है। तेजस्वी यादव नीतीश कुमार 10 लाख नौकरी का वादा करते हैं लेकिन जब तीन साल में डिग्री नहीं दे रहे तो नौकरी कहां से दें?

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