एआरटी सेंटर की बदहाली होगी दूर, बायोमीट्रिक प्रणाली से दर्ज होगी कर्मियों की उपस्थिति
मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार का एम्स कहा जाने वाला एसकेएमसीएच का एआरटी सेंटर इन दिनो पूरी तरह बदहाल है। यहां न समय से कोई कर्मी आते हैं और न ही मरीजों को किसी तरह की सुविधा ही मिलती है।
शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमघट लगने लगता है और परिसर मे आवारा जानवर घूमते रहते हैं। यहां कर्मचारियों के आने-जाने का कोई समय निश्चित नहीं है जबकि एआरटी सेंटर का कार्य अवधि सुबह 9 बजे से 4 बजे संध्या तक है। एसकेएमसीएच के इमरजेंसी में गंभीर हालत में इलाज के लिए जब मरीज पहुंचते है तो उनको ट्राली सेवा भी नहीं मिलती है। परिणामस्वरूप मरीज के परिजन, स्वयं स्टेचर पर मरीज को लेकर अस्पताल से बाहर एक्सरे के लिए ले जाते है। परिजनों ने बताया कि यहां कोई सुनने वाला नहीं है। मालूम हो कि अस्पताल की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीएस झा रात-दिन एक कर दिए हैं, लेकिन उनके सपनों को साकार अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मी से लेकर स्थाई कर्मी तक नहीं होने देने का शायद कसम खा लिए हैं। इस कारण जब तब इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के साथ परेशानियां उत्पन्न होती रहती है। यदि नहीं सामान वार्ड में भर्ती मरीजों को भी इमरजेंसी में लाने के लिए कोई ट्रॉली मैन तक नहीं मिलते हैं। ऐसी शिकायतें मिलने के बाद अस्पताल अधीक्षक डा. बीएस झा ने जब एआरटी सेंटर का निरीक्षण किया तो वहां की स्थिति देखकर वे भी हतप्रभ रह गये। इसके बाद उन्होने सेंटर मे कार्यरत कर्मियों के लिए बायोमिट्रिक पद्धति से उपस्थिति दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया।
अब कर्मी 9 बजे सुबह सेंटर मे प्रवेश करते समय और शाम 4 बजे ड्युटी समाप्त कर बाहर निकलते समय बायोमिट्रक उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसी आधार पर उनके वेतन का भुगतान किया जाएगा। अधीक्षक ने 9 बजे सुबह से 4 बजे शाम तक कर्मियों को एआरटी सेंटर मे उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया है।इसमे कोताही करने वालों को अगली अवधि का सेवाविस्तार भी नहीं किया जाएगा।