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कृषि मंत्री ने राज्यस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिये आवश्यक निदेश

पटना। कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत की अध्यक्षता में आज मीठापुर, पटना अवस्थित कृषि भवन के आडिटोरियम में विभागीय मुख्यालय एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ राज्यस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष राज्य में रबी फसलों के लिए वर्तमान मौसम बहुत ही अनुकूल है। इस वर्ष रबी में फसलों का आच्छादन रकबा बढ़ा है। इसलिए हमारी पहली प्राथमिकता फसल प्रबंधन के साथ-साथ फसलों में लगने वाले कीट@ब्याधियों पर नियंत्रण करने के उपाय के बारे में समय-समय पर किसानों को अवगत कराना चाहिए, ताकि राज्य में रबी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकत्ता में आशातीत वृद्धि हो सके। उन्होंने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को गरमा मौसम में लगने वाले फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज किसानों को ससमय उपलब्ध कराने का निदेश दिया। साथ ही उन्होंने निदेश दिया कि किसानों की सुविधा के लिए बीजों की होम डिलीवरी पर विशेष ध्यान दिया जाये।
मंत्री ने कहा कि अंधाधुंध तथा असंतुलित उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी के साथ-साथ मानव का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। इसलिए रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने हेतु विभाग द्वारा जैविक खेती के साथ-साथ हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरी खाद के रूप में ढ़ैंचा, मूंग आदि की खेती से खेतों की उर्वरा-शक्ति, जो रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से कम हुई है, की भरपायी की जा सकेगी। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारियों को हरी खाद को बढ़ावा देने का सख्त निदेश दिया। जैविक खेती में प्रमाणीकरण की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए मुख्यालय स्तर से प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के अनुश्रवण एवं निरीक्षण हेतु विशेष टीम गठित कर प्रमाणीकरण के माप-दण्डों के आलोक में जाँच की जायेगी।
उन्होंने कहा कि बिहार के सीमावर्ती जिलों में वहाँ के पदाधिकारियों द्वारा उर्वरक लदे वाहन यथा ट्रक, ट्रैक्टर आदि को पकड़कर उसके ड्राईवर पर प्राथमिकी दर्ज कराने से संबंधित खबर अखबारों में छपती रहती है, जिससे असली गुनाहगार बच जाते हैं। उन्होंने ऐसे वाहन मालिक एवं उर्वरक की कालाबाजारी करने वाले दुकानदार/व्यवसायी पर प्राथमिकी दर्ज करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि उर्वरक की कालाबाजारी अथवा मूल्य से अधिक कीमत पर विक्री के लिए केवल बड़े अधिकारी ही जिम्मेवार नहीं है। बल्कि इसके लिए कृषि समन्वयक, प्रखण्ड/अनुमंडल/जिला स्तर के पदाधिकारी भी उससे अधिक जिम्मेवार हंै। इस तरह की खबरों से विभाग की प्रतिष्ठा धूमिल होती है। उन्होंने कहा कि विभागीय सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने कर्तब्य का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। वरीय पदाधिकारियों को समय-समय पर विभागीय योजनाओं का अनुश्रवण करना चाहिए।
कुमार ने निदेश दिया कि वाट्सऐप गु्रप पर मैसेज सूचनापट्ट एवं समाचार पत्रों के माध्यम से उर्वरक की उपलब्धता के बारे में सही जानकारी को सार्वजनिक करें, जिससे किसान उग्र न हो। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रखण्डों में होर्डिंग के माध्यम से विभागीय योजनाओं के बारे में किसानों को सही जानकारी दें।
इस बैठक में कृषि निदेशक डाॅ0 आदित्य प्रकाश, अपर निदेशक (शष्य) श्री धनंजय पति त्रिपाठी, निदेशक बामेती श्री आभांशु सी0 जैन सहित मुख्यालय के पदाधिकारी, प्रमंडलीय संयुक्त निदेशक एवं विभागीय जिला स्तर के पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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