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नाटक के जरिए बताया लू लगने से बचने का तरीका

फुलवारी शरीफ। सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की ओर से साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक की श्रृंखला में महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं अमन राज द्वारा निर्देशित नाटक- “लू का कहर” की प्रस्तुति वाल्मी में की गई।
नाटक की शुरुआत सौरभ राज के स्वरबध्द गीत -दुपहरिया के लू में, घर से निकले से पहिले, रखिह आपन ख्याल हो भईया, ई हवे जानलेवा… से की गई।
इस नाटक के माध्यम से दिखाया गया कि भीषण गर्मी के चलते गर्म हवाओं एवं लू का हमारे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है। गर्म हवाएं और लू के बुरे प्रभाव से किस तरह से बचा जा सकता है।
नाटक के दृश्य में दोपहर की चिलचिलाती धूप में जब एक युवक घर से बाहर निकलने लगता है तो उसके पिता उसे रोककर सुझाव देते हैं कि तुम जो पॉलिस्टर का शर्ट पहने हो, उसे निकाल कर सूती का फूल शर्ट पहन लो, धूप का चश्मा लगा लो, माथे पर गमछा या टोपी से ढ़क लो, घर से निकलने से पहले भरपेट पानी पी लो। खीरा, ककड़ी, संतरा के साथ लस्सी, नींबू-पानी, आम का पन्ना पी लो। पर पिता के सुझाव को नजर अंदाज करके बेटा घर से बाहर निकल जाता है। फिर रास्ते में पैदल चलते हुए वो धूप में चक्कर खाकर गिर जाता है। तभी कुछ लोग उसे उठाकर पेड़ के नीचे छांव में लिटाते हैं और सिर नीचे की ओर तथा पैर थोड़ा ऊपर कर उसका शर्ट उतार देते हैं और ठंडे गीले कपड़े से शरीर को पोंछते हैं और पंखे से हवा देते हैं। उसके गर्दन, पैर एवं सर को बार-बार गीले और ठंडे कपड़े से पोंछते हैं। वहां पर इकठ्ठा हुए लोगों में से एक व्यक्ति कहता है कि ओआरएस, नींबू-पानी, नमक-चीनी का घोल, छांछ या शरबत पीने के लिए दो। पीने के बाद भी एक घंटा तक सुधार नहीं होने पर उसके परिजन उसे अस्पताल ले जाते हैं जहां इलाज के बाद वह ठीक होता है। फिर वह अपनी गलती के लिए पिता से माफी मांगते हुए कहता है कि इस प्राकृतिक आपदा की मार से मैं ग्रसित नहीं होता यदि आपका सुझाव मान लेता। इसलिए आपदाओं में सुझाव एवं बेहतर पूर्व तैयारी से ही होता है बचाव।
नाटक के कलाकार- महेश चौधरी, मिथिलेश कुमार सुमन पांडे, सौरभ राज, अमन, करण, नमन, वीर, शशांक, रंजन आदि थे।

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