बिहार को 5,4500 करोड़ राजस्व प्राप्त, सबसे अधिक खर्च करने वाले 5 राज्यों में बिहार शामिल
पटनाः राज्य सरकार ने आर्थिक विकास को गति देने के लिए अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में न्याय के साथ विकास के उद्देश्य को सार्थक बनाने का प्रयास किया है। 2005 में 3,561 करोड़ राजस्व बिहार को प्राप्त होता था। लेकिन आज 5,4500 करोड़ राजस्व प्राप्त हो रहा है। 2005 में 20 हजार 58 करोड़ रुपये बजट था आज बिहार में 2 लाख 5 हजार करोड़ बजट पर खर्च हो रहा है। ये बातें प्रदेश के योजना विकास मंत्री विजेंद्र यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि ये तभी संभव हुआ जब आईक्यू वाला नेतृत्व हमारे पास है। उन्होंने कहा कि बिहार में संसाधन काफी कम है, फिर भी बिहार विकास कर रहा है। योजना विकास मंत्री विजेंद्र यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ‘राज्य का कुल व्यय पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ है। वर्ष 2004-05 में कुल बजट 23885 करोड़ रुपये था। जिसमें से मात्र 20058 करोड़ रुपये ही खर्च हुआ। वहीं वर्ष 2021-22 में बिहार का कुल बजट आकार 218 लाख करोड़ रुपये रखा गया और राज्य सरकार 2 लाख करोड़ रुपये व्यय करने में सफल रही है, जो पिछले वर्ष 2020-21 के व्यय से 21 प्रतिशत ज्यादा है’- विजेंद्र यादव, मंत्री योजना एवं विकास। वहीं, मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा बिहार में सीपोर्ट नहीं है और जिन राज्यों के पास सीपोर्ट है उनमें महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्य शामिल हैं और उससे बिहार की तुलना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश में ऐसी सीपोर्ट नहीं है लेकिन वहां उद्योग धंधे का विकास पहले से काफी अधिक हुआ है। लेकिन हमारे पास सीमित संसाधन के बावजूद लगातार बिहार उपलब्धि हासिल कर रहा है। बिहार देश में 2 लाख करोड़ रुपये व्यय करने वाले पांच बड़े राज्यों में शामिल हो गया है। बिहार के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडू ने 2 लाख करोड़ रुपये व्यय की उपलब्धि को हासिल की है, जो बिहार के लिए गर्व की बात है।