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लेट्स इन्सपायर बिहार अभियान से तेज़ी से जुड़ रहें, बौद्धिक और पत्रकार!

यूँ तो, पत्रकारों की सोच स्वछंद और निर्मल होती है,पर बात राष्ट्र निर्माण की हो तो उनका कलम कठोर हो जाता हैं। कलम से निकले सत्य कितने के जेहन में चुभने लगता है। समाज के निर्माण में आरम्भ से पत्रकारिता की अहम भूमिका रहीं हैं। भारत के पहले समाचार पत्र की स्थापना साल 1780 में हुई थी। उस समाचार पत्र ने उस वक़्त अंग्रेज़ साम्राज्य को आईना दिखाने के काम किया था। उसने हुकूमत को प्रेस की ताक़त का एहसास करवाया था। बात हो रही है ‘बंगाल गज़ट’ की जिसे भारत से प्रकाशित होने वाले पहले अख़बार का दर्ज़ा प्राप्त है। बंगाल गज़ट की शुरुआत जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने की थी। राजा राम मोहन रॉय की इतिहास में एक समाजसुधारक की छवि है। उस समय भारतीय समाज अंधविश्वास और कुरीतियों से लिप्त था, जिस पर राजा राम मोहन रॉय ने अपने अखबारों के जरिये गहरे प्रहार किए और जनता में जागरूकता पैदा की। उन्होंने ब्रह्ममैनिकल मैग्ज़ीन(अंग्रेजी), संवादकौमुदी(बांग्ला) और मिरातुल-उल-अख़बार(फारसी) जैसे अखबारों का संपादन और प्रकाशन किया। उन्होंने द्वारकानाथ टैगोर एवं प्रसन्न कुमार टैगोर के साथ साप्ताहिक समाचार पत्र ‘बंगदूत’ निकाला। बंगदूत एक अनोखा अख़बार था, इसमें बांग्ला, हिन्दी और फारसी भाषा का प्रयोग एक साथ किया जाता था। यह आप सब के सामने लिखते हुए, अति प्रसन्नता हो रही कि आज ऐसे ही देश भक्त, समाजसुधारक पत्रकार मित्र लेट्स इन्सपायर बिहार अभियान से जुड़ रहें। आईपीएस श्री विकास वैभव की ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और उनकी कर्मठता को एक साथ एक मंच पर खड़े होकर बल दे रहें हैं। ऐसे सच्चे राष्ट्रभक्त पत्रकारों को, मैँ तहेदिल शुक्रिया कर रहा। इन सब महान व्यक्तित्व के जुड़ने से अभियान ससक्त हुआ हैं। बिहार के लोग इतने जागरूक हो चुके है कि जैसे ही लेट्स इन्सपायर बिहार अभियान से सम्बंधित कोई भी मैसेज मैँ ग्रुप में डालता हूँ, उनकी प्रतिक्रियाएं तुरन्त मुझे प्राप्त होने लगती हैं। कलम के सिपाहियों से मेरा विनम्र निवेदन है कि बिहार के परचम को विश्वपटल पर सम्मानित करने हेतु अपना कीमती सुझाव और जन मानस हेतु प्रेरक सन्देश अग्रसारित करते रहें। अब समय आन पड़ा है। आपकी लेखनी के एक शब्द हज़ारों के कान तक पहुंचेंगे। लोगों को अनुभूति होने लगी है कि ऐसे ही हज़ारों बौद्धिक और पत्रकार लेट्स इन्सपायर बिहार अभियान से नहीं जुड़े हैं। निश्चित ही लोगों की आंखों में बिहार को लेकर एक आशा जगी हैं। इस उम्मीद की मशाल आईपीएस श्री विकास वैभव के नेतृत्व में हज़ारों के हाथों में पहुंच चुकी हैं। सब को यह अनुभूति है कि यह शरीर नश्वर है। इसलिए ईश्वर ने बिहार के बदलाव के लिए उनको चुना हैं। वेदों में जीवात्मा के पांच शरीर बताए गए हैं- जड़, प्राण, मन, विज्ञान और आनंद। इस पांच शरीर या कोष के अलग-अलग ग्रंथों में अलग-अलग नाम हैं जिसे वेद ब्रह्म कहते हैं उस ईश्वर की अनुभूति सिर्फ वही आत्मा कर सकती है जो आनंदमय शरीर में स्थित है। मेरा मानना है कि राष्ट्र को समर्पित जीवन से बड़ा कोई धर्म नहीं। जीवन के हर पल को हम बिहार के लिए समर्पित कर दे। शिक्षा, समता और उद्यमिता के क्षेत्र में अपना अनमोल योगदान देकर सच्चे बिहारी होने का परिचायक बनें।

जय हिंद जय बिहार

राहुल कुमार सिंह, लेट्स इन्सपायर बिहार

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