अंबेडकर अस्पताल में सर्दी-खांसी, शुगर व गैस की सामान्य दवा नहीं, बेंडेज-सूचर तक खत्म, सीजीएमएससी ने अप्रैल से सप्लाई कर दी बंद
रायपुर: अंबेडकर अस्पताल में पिछले 4 महीने से दिल और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की कई जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है।अंबेडकर अस्पताल में पिछले 4 महीने से दिल और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की कई जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है। सर्दी-जुकाम, शुगर और गैस जैसी बीमारियों की बेहद कॉमन दवाएं तक चार महीने सरकारी सप्लाई में नहीं है। ऑपरेशन के बाद लगाया जाने वाला विशेष तरह का सूचर और बेंडेज भी नहीं है। लगभग हर मरीज के लिए जरूरी स्लाइन तक नहीं है। जब जिस मरीज को जरूरत पड़ रही है, अस्पताल प्रशासन लोकल पर्चेस के जरिये उपलब्ध करवा रहा है।इसमें कई बार देरी होती है और मरीज के रिश्तेदारों को खरीदना पड़ता है। पिछले चार महीने में अस्पताल प्रशासन 1.50 करोड़ से ज्यादा की दवा व सिरप खरीदकर मरीजों को उपलब्ध करवा चुका है। ये सुविधा भी केवल उन मरीजों को मिल रही है जो गरीबी रेखा के दायरे में आते हैं या जिनके पास मजदूर कार्ड होता है।बाकी मरीजों के रिश्तेदारों को बाजार से खरीदकर लाना पड़ रहा है। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि अस्पताल प्रशासन को हर महीने लगभग 35 लाख की दवाएं लोकल पर्चेस के माध्यम ये खरीदनी पड़ रही है। लोकल पर्चेस में दवाएं कुछ महंगी मिलती है, साथ ही टेस्टिंग भी पूरी तरह से नहीं हो पाती। सरकारी दवा कंपनी सीजीएमएससी किसी भी कंपनी से दवाएं खरीदने के बाद लैब में उसकी टेस्टिंग करवाती है।लैब से रिपोर्ट ओके आने के बाद ही मरीजों के लिए सप्लाई की जाती है, लेकिन लोकल पर्चेस में दवा सप्लायर वेंडर पर ही विश्वास कर दवाएं लेनी पड़ती है। लोकल पर्चेस में इतना समय भी नहीं रहता कि क्योंकि लैब से टेस्टिंग रिपोर्ट आने में भी एक-एक महीने लग जाते हैं। इसलिए जब जिस दवा या उपकरण की जरूरत पड़ती है मरीज को उपलब्ध करा दिया जाता है।कई बार चिटि्ठयां लिखने के बावजूद दवा कार्पोरेशन ने नहीं सुधारा सिस्टमएंटी बायोटिक तक नहीं अस्पताल में हार्ट और कैंसर के मरीजों को क्रिटिकल स्थिति में लगाए जाने वाले जीवन रक्षक एंटी बायोटिक इंजेक्शन तक नहीं है। यहां तक कि पीआईसीयू में भर्ती गंभीर बच्चों के लिए जरूरी इंजेक्शन तक स्टॉक से गायब है। अस्पताल प्रबंधन को इमरजेंसी में एंटीबायोटिक इंजेक्शन और जरूरी टेबलेट तक खरीदना पड़ रहा है। हर वार्ड से आती है मांग सीजीएमएससी से सप्लाई बंद होने के बाद से अस्पताल प्रशासन ने हर विभाग के एचओडी से जरूरी दवाओं की सूची मंगवानी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार हर हफ्ते दवा का बड़ा स्टॉक लोकल पर्चेस किया जाता है। रोज इमरजेंसी में भी कई दवाएं और सूचर मंगवाना पड़ रहा है।अस्पताल में दवा सप्लाई का ये है सिस्टमसरकार ने अच्छी तरह से टेस्टिंग के बाद अस्पतालों में दवा सप्लाई करने दवा कंपनी बनायी है। ये दवा कंपनी अंबेडकर अस्पताल सहित राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों व जिला व सिविल अस्पतालों से दवाओं के इंडेन मंगवाती है। सालभर की जरूरत के हिसाब से दवाओं की सूची और उसकी मात्रा हर अस्पताल से दी जाती है।दवा कंपनी बजट में पैसे मिलने के बाद अस्पतालों से मिली सूची के हिसाब से खरीदी के आर्डर देती है। कंपनी ही पूरा स्टॉक मंगवाने के बाद हर दवा की टेस्टिंग करवाती है। टेस्ट रिपोर्ट में सफल होने के बाद दवा की सप्लाई एक-एक अस्पताल में की जाती है। पता चला है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से जितना स्टॉक मांगा जाता है, उतना कभी सप्लाई नहीं किया जाता।450 दवाओं में सिर्फ 150 ही स्टॉक मेंदवाएं जो अस्पताल में नहींदवा – उपयोगसिफ्त्री – अक्ससिनएंटीबायोटिकसिट्रीजिन टेबलेट – एलर्जी सर्दीक्लोपीग्रेल – हार्ट की दवाअमिकासिन इंजे. – संक्रमण मेंसोडियम बायोकार्बोनेट – गंभीर स्थिति मेंनार्मल स्लाइनहर मरीज के लिएपैंटाप्राजोल – गैससूचर – सर्जरी में उपयोगसिरप – खांसी की सिरप नहींशुगर – कांबिनेशन वाली एक भी नहींअंबेडकर अस्पताल के मेडिकल स्टोर्स में स्टॉक में दवाएं नहीं है। इसलिए इमरजेंसी में लोकल पर्चेस के माध्यम से खरीदकर हर किस्म की दवा दी जा रही है। -डॉ. बीपी नेताम, अधीक्षक, अंबेडकर अस्पतालमेरी पोस्टिंग के बाद से सिस्टम सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हर अस्पताल से इंडेन मंगवाने में दिक्कत होती है, लेकिन इसे सुधारेंगे।
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