बाहर से रंग कर चमका रहे स्कूल की बिल्डिंग, अंदर टूटकर गिर रहे छत से मलबा
महोबा: महोबा में बीते दिनों सरकारी विद्यालय की जर्जर हो चुकी छत का मलबा पढ़ाई के दौरान अचानक गिरने से हादसा हो गया था। इस हादसे में मलबे की चपेट में आकर एक छात्र सहित महिला शिक्षामित्र को भी चोटें आई थी। इस घटना के बाद से शिक्षा विभाग के जिम्मेदार लापरवाही पर कुछ भी बोलने से बच रहे है।जबकि सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट विभाग ठिकाने लगा देता है। हमारे संवाददाता ने उक्त सरकारी विद्यालय में जाकर हुए हादसे के कारणों को न केवल जाना बल्कि जिम्मदारों की लापरवाही को भी समझा है।ये स्कूल केवल बाहर से दिखने में इतना खूबसूरत है। अंदर की हकीकत हुए घटना से पता चलती है।ग्राम प्राधन से कराया गया था अवगतजर्जर छत का प्लास्टर अचानक से भर-भरा कर गिर जाने से एक छात्र और शिक्षा मित्र घायल हो गए थे। इस स्कूल के प्रधान अध्यापक प्रकाश नारायण ने बताया की घटना के समय क्लास में 15 छात्र मौजूद थे। एक बड़ा हादसा टल गया है। उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान, शिक्षा समिति और बीएसए को छत की मरम्मत के लिए पत्र लिखा था। लेकिन किसी ने नहीं सुना। जिससे यह हादसा हो गया।सरकारी प्राइमरी स्कूल की छत का प्लास्टर गिरने की यह घटना जनपद के पनवाड़ी ब्लाक अंतर्गत ग्राम मसूदपुरा की है। विद्यालय की छत काफी अरसे से चिटकी हुई जर्जर है। ऐसे में हादसे के साये में अध्ययन कार्य होता आ रहा था। जबकि पूर्व में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने ग्राम के प्रधान से भी बताया था की स्कूल की छत जर्जर है। कभी भी हादसा हो सकता है। लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही गंभीरता दिखाई।स्कूल के छत से मलबा गिरा था। जिसमें ये बच्चा घायल हो गया। इसके सिर में चोट आई थी।एक छात्र और शिक्षा मित्र घायलघायल शिक्षामित्र रामदेवी बताती है अध्ययन कार्य के दौरान जब बच्चों को पढ़ा रही थी। सलमान नाम का छात्र पास खड़ा होकर अपनी पुस्तक को चेक करा रहा था। अचानक जर्जर हो चुकी छत में चल रहा पंखा मलवा सहित नीचे गिर पड़ा। जिसकी चपेट में आकर शिक्षामित्र और उक्त छात्र सलमान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सलमान के सिर पर गहरी चोट आई है, जबकि शिक्षामित्र चोटिल हुईं हैं।बाहर से चमकने वाले स्कूल की अंदर की हकीकत सब बयां कर रही है। छत से सीमेंट की परत टूटकर नीचे गिर गई थी। जिसमें छात्र और टीचर दोनों बुरी तरह घायल हुए थे।स्कूल का छत बेहद कमजोरकरीब 58 साल पुराने इस मसूदपुरा के सरकारी स्कूल में रंग, रोगन और फर्श में टायल्स लगे है। पर छत बेहद कमजोर है। छत में पड़ी दरारे साफ दिखाई पड़ रही है। इस स्कूल के उप प्रधान अध्यापक रफीक ने बताया की स्कूल की बिल्डिंग 1965 में बनी थी। जिसकी मरम्मत के लिए कई बार शिकायत की गई। पर किसी ने नहीं सुना। जिसके बाद यह हादसा हो गया है।आपको बता दें कि विद्यालयों के कायाकल्प के लिए बजट आता रहा। इसकी दीवारों को रंगने ,टाइल्स लगाने का काम किया जाता रहा। ताकि स्कूल की बाहरी खूबसूरती बनी रहे। मगर कमजोर हो रही छत पर कोई काम नहीं कराया गया। नतीजन हादसा हो गया। अभी स्कूल के अन्य कक्षों की हालत सही नहीं है। दीवारों पर साफ दरारें देखि जा सकती है जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।इस तरह से छत से टपक कर गिर जाता है मलबा। जान जोखिम में डालकर पढ़ते हैं छात्र।स्कूल की बिल्डिंग को तोड़ देना चाहिएजिम्मेदारों की इस पर निगाह ही नहीं जा रही। स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से घायल हुआ कक्षा एक में पढ़ने वाला छात्र सलमान सिर में पट्टी बांधे हुए स्कूल में मौजूद था। जो आज भी डरा हुआ दिखाई दें रहा है। स्कूल की छत गिरने की घटना के बाद से छात्र सहमे हुए हैं। वहीं घायल हुए छात्र सलमान के माता, पिता दोनों मजदूरी करते है। उन्होंने कहा की स्कूल की बिल्डिंग को तोड़कर नया बनाना चाहिए। क्योंकि जो घटना उनके बेटे के साथ हुई है वो किसी और बच्चे के साथ न होने पाए।घटना के बाद अधिकारी मौनशिक्षा विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने और सामने आने को तैयार नहीं है। बार-बार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा को फोन किया गया। पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। जब हम उनके दफ्तर पहुंचे तो बीएसए साहब नदारत थे। उनके दफ्तर में ताला बंद था। बहरहाल इस घटना को लेकर सुबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जरूर जांच और कार्रवाई की बात कही है।
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