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अतिपिछड़ों के सबसे बड़े हितैषी हैं नीतीश कुमारः राजीव रंजन

पटना। पटना के कंकड़बाग में सैंकड़ों की संख्या में अतिपिछड़ा समाज के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता बनाये जाने पर पूर्व विधायक व अतिपिछड़ा समाज के नेता राजीव रंजन का जोरदार स्वागत किया गया। जदयू महासचिव ने इस अवसर पर उपस्थित सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का आभार प्रकट किया।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अतिपिछड़े समाज का सबसे बड़ा हितैषी बताते हुए कहा कि बिहार का इतिहास गवाह है कि आजादी के बाद राज्य में कई मुख्यमंत्री बने लेकिन कर्पूरी ठाकुर जैसे अपवादों को छोड़ कर अतिपिछड़े समाज के लिए किसी ने कुछ नहीं किया। सारे दलों में अतिपिछड़े समाज को हर बार खोखले वादों के सहारे ठगने की होड़ सी मची रही। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सत्ता संभालते ही ऐसे एतिहासिक कार्य किये जिससे समाज के हर तबके के साथ-साथ अतिपिछड़े समाज को विशेष लाभ मिला।
जदयू महासचिव ने कहा कि अतिपिछड़ा समाज के युवा विशेषकर बेटियां अशिक्षा से प्रभावित थी, लेकिन नीतीश सरकार द्वारा चलाई गयी साईकिल योजना, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति योजना आदि ने पूरी तस्वीर बदल कर रख दी। इसी तरह बाल विवाह और शराब के खिलाफ उठाये गये कदमों का भी सर्वाधिक लाभ इसी समाज को मिला है।
उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार के कारण ही आज बिहार के हर गांव में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा पहुंच चुकी है। जीविका के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं में स्वावलंबन की भावना जागृत हुई है। अतिपिछड़ा समाज के लोग इससे भी बड़ी संख्या में लाभान्वित हुए हैं। भाजपा को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां नीतीश सरकार अतिपिछड़ों के विकास के लिए दिन रात एक किये हुए है वहीं दूसरी तरफ भाजपा अतिपिछड़ा विरोधी मानसिकता के नेताओं का जमावड़ा बन चुकी है जहां इस समाज के नेताओं को कदम कदम पर अपमानित किया जाता है। पार्टी पर कब्जा जमाए सामंती विचारधारा के नेताओं ने अतिपिछड़ा समाज के नेताओं का जीना दूभर कर दिया है। हालात ऐसे हो गये हैं कि इनके अतिपिछड़ा समाज के सबसे बड़े नेता और अतिपिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने भी अपना त्यागपत्र दे दिया है। इनके अतिपिछड़ा प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक उन्हें अतिपिछड़ा समाज के महापुरुषों की जयंती मनाने की अनुमति तक नहीं है। यहां तक कि उन्हें कर्पूरी ठाकुर जैसी महान हस्ती की जयंती मनाने की भी मनाही है। उनके बजाए उन्हें दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर मनाने पर जोर दिया जाता है। भाजपा बताये कि किस मामले में कर्पूरी ठाकुर का योगदान इनसे कमतर है।
जदयू नेता ने कहा कि अतिपिछड़ा समाज की संख्या बिहार में सर्वाधिक है। इसीलिए भाजपा के नेता उनपर डोरे डालते रहते हैं, लेकिन उनके अतिपिछड़ा मोर्चा अध्यक्ष के इस्तीफे से यह साफ है कि भाजपा के नेता अतिपिछड़ा को इन्सान भी नहीं समझते। अपने बड़े नेताओं के रवैए से पार्टी के अतिपिछड़े समाज के नेताओं का दुःख और आक्रोश दोनों ही बढ़ता चला रहा है और अब इनके कई नेता अलग राह देखने लगे हैं।
भाजपा यह जान ले कि अतिपिछड़ों का हितैषी बनने का दिखावा कर के, हमारे समाज की पीठ में छूरा घोंपने का उनका खेल अब बिहार की जनता के सामने एक्सपोज हो गया है। अतिपिछड़ा समाज को बरगला कर उनका वोट खींचने का भाजपा का षड्यंत्र हम कभी कामयाब नहीं होने देंगे।
इस मौके पर शंकर प्रसाद, सीमा पटेल, जितेंद्र रावत, संटू पटेल, बिक्की पटेल, कुंदन कुमार सपना, अमीत कुमार, ललित प्रसाद आदि उपस्थित रहें।

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