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धीरेंद्र शास्त्री कथा में उमड़ी जन सैलाव से सिद्ध होता इस देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका धर्म है

पटना । एक पच्चीस वर्ष का युवा कथावाचक बिहार जैसे राज्य में आता है और दूसरे ही दिन आठ से दस लाख की भीड़ उमड़ परती है, तो यह सिद्ध होता है कि अब भी इस देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका धर्म है । यह इसलिए भी कहा जा रहा है कि इसी बिहार की भूमि पर किसी बड़े राजनेता की रैली में 50 हजार की भीड़ जुटाने के लिए द्वार द्वार पर गाड़ी भेजते और पैसे बांटते सब ने देखा है । वैसे समय में कहीं दूर से आये किसी युवक को देखने के लिए पूरा राज्य दौड़ पड़े, तो आश्चर्य होता है। यही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का सबसे बड़ा चमत्कार है।
समाजिक कार्यकर्ता व पूर्व जिला पार्षद वैशाली के अशोक चौधरी ने हमारे सहयोगी व समाजसेवी ईं आर के जायसवाल से बातचीत में उन्होंने इस जन सैलाव के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि ये दस लाख की भीड़ किसी एक जाति की भीड़ नहीं है, उसमें सभी हैं। ब्राह्मण-भुमिहार हैं, तो कोइरी कुर्मी भी, राजपूत हैं तो कानु, कलवार,बनिया भी, यादव हैं तो हरिजन भी । यह वही बिहार है जहां हर वस्तु को जाति के चश्मे से देखने की परम्परा सी बन गयी है, उस टूटे हुए बिहार को एक युवक पहली बार में इतना बांध देता है, तो यह विश्वास दृढ़ होता है कि हमें बांधना असम्भव नहीं, राजनीति हमें कितना भी तोडे, धर्म हमें जोड़ ही लेगा ।
आयातित तर्कों के दम पर कितना भी बवंडर बतिया लें, पर यह सत्य है कि इस देश को केवल और केवल धर्म एक करता है, कश्मीर से कन्याकुमारी के मध्य हजार संस्कृतियां निवास करती हैं। भाषाएं अलग हैं, परंपराएं अलग हैं, विचार अलग हैं, दृष्टि अलग है, भौगोलिक स्थिति अलग है, परिस्थितियां अलग हैं, फिर भी हम एक राष्ट्र हैं तो केवल और केवल धर्म के कारण! धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उसी धर्म की डोर से सबको बांध रहे हैं और हम लाखो उनके दीवाने हैं।
वहीं कुछ लोग उनके चमत्कारी होने को लेकर उनकी आलोचना करते हैं, मैं अपनी कहूँ तो चमत्कारों पर मेरा अविश्वास नहीं, एक महाविपन्न परिवार से निकला व्यक्ति यदि युवा अवस्था में ही देश के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल हो जाता है, तो इस चमत्कार पर पूरी श्रद्धा है । धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने समय के मुद्दों पर स्पष्ट बोलते हैं, यह उनकी शक्ति है। नवजागृत चेतना को अपने संतों से जिस बात का असंतोष था कि वे हमारे विषयों पर बोलते क्यों नहीं, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उस असन्तोष को शांत कर रहे हैं। यह कम सुखद नहीं । उन्हे ईश्वर रोके तो रोके, अब अन्य कोई नहीं रोक सकेगा, धीरेंद्र समय की मांग हैं। यह समय ही धीरेंद्र शास्त्री का है।
साथ ही चौधरी जी ने कहा मैं स्पष्ट मानता हूँ कि यह भारत के पुनर्जागरण का कालखंड है, अब हर क्षेत्र से योद्धा नायक निकलेंगे,
राजनीति, धर्म, अर्थ, विज्ञान, रक्षा हर क्षेत्र नव-चन्द्रगुप्तों की आभा से जगमगाएगा क्यों कि शास्त्री जी में एक अद्भुत प्रतिभा यह है की वो किसी भी धर्म का विरोध रोध नहीं करते ।

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