पटना बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ . अनिल सुलभ ने आज ‘ चिठियां रेणु की भाई बिरजू को ‘ नामक पुस्तक का विमोचन किया
इस कार्यक्रम का आयोजन एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीच्यूट ( आद्री ) , ‘ अपना आप वर्ल्डवाइड ‘ और गांधी संग्रहालय द्वारा किया गया था । इस पुस्तक का सम्पादन श्रीमती रुचिरा गुप्ता और श्री प्रयाग शुक्ल द्वारा किया गया है और यह राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित है । श्री प्रयाग शुक्ल ने इस पुस्तक को बिहार के प्रख्यात साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा अपने मित्र श्री बालकृष्ण गुप्ता को लिखे पत्रों का संग्रह बताया । उन्होंने कहा कि बड़ी प्रतिष्ठा वाले लेखकों का जीवन समाप्त नहीं होता है और यह पुस्तक यह साबित करती है । रेणु ने लोक जीवन के आनंद को हमारे पास पहुंचाया है । प्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफेसर अरुण कमल ने इस पुस्तक में प्रस्तुत रेणु के जीवन के तीन पहलुओं पर प्रकाष डाला । रेणु में हमेशा आर्थिक तंगी का सामना करते थे और अच्छा खानपान के षौकिन थे । साथ ही वह राजनीति में भी शामिल थे । निर्मल वर्मा के हवाले से प्रोफेसर अरुण कमल ने कहा कि रेणु की किताबों को पढ़ना एक अंकुष के साथ – साथ वरदान भी है । डॉ अनिल सुलभ ने कहा कि रेणु एक ऐसे लेखक थे जो लोगों की नब्ज को बखूबी पहचान सकते थे । श्रीमती रुचिरा गुप्ता ने बताया कि रेणु कोसी नदी को नारी के रूप में चित्रित किया करते थे । इस अवसर पर प्रख्यात समाजवादी नेता श्री शिवानंद तिवारी ( राजद ) ने भी अपने विचार रखे और जन सेवा में बालकृष्ण गुप्ता के परिवार की भूमिका की प्रशंसा की । इस अवसर पर डॉ रामबचन राय , श्री तरुण कुमार , डॉ ब्रजेश पांडेय ने भी अपने विचार रखे । पुस्तक लोकार्पण से पूर्व श्रीमती रुचिरा गुप्ता द्वारा तैयार किए गए चित्रों की प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई । इस अवसर पर इप्टा और नृवागा के कलाकारों ने अपने संगीत और गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । इससे पूर्व , आद्री के सदस्य सचिव डॉ . प्रभात पी घोष ने अपने स्वागत भाषण में रेणु की प्रशंसा की कि वे एक लेखक के रूप में सफल रहे हैं , भले ही वह अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान ग्रामीण पृष्ठभूमि से थे और मामूली साधनों में पले – बढ़े थे । अधिकांश सफल लेखक संभ्रांत और शहरी पृष्ठभूमि से रहे हैं । कार्यक्रम का संचालन डॉ अस्मिता गुप्ता ने किया और धन्यवाद ज्ञापन राजकमल प्रकाशन के श्री अशोक माहेश्वरी ने किया । अंजनी कुमार वर्मा