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गंगा नदी को फतुहा से नदी का नाला बना दिया गया: डॉ लक्ष्मी नारायण

फतुहा। जिस गंगा जल को अमृत माना जाता है जिसमें कई रोगों के किटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रही है। गंगाजल को हर एक घर में रखा जाता है जो सालों साल तक नहीं सड़ता था। कई इतिहासकार बताते हैं कि शासक अकबर स्वयं को गंगा का सेवन करता ही था, तथा मेहमानों को भी गंगाजल पिलाता था। अंग्रेज लिखते हैं कि अंग्रेज जब कोलकाता से वापस इंग्लैंड जाते थे तो पानी पीने के लिए जहाज से गंगा का पानी ले जाते थे, क्योंकि पानी सड़ता नहीं था‌। करीब डेढ़ सौ साल पहले आगरा में तैनात ब्रिटिश डॉ हॉकिन ने ‌ वैज्ञानिक परीक्षण से सिद्ध किया कि हैजे के बैक्टीरिया को मारने की गजब की क्षमता है। लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एन बी आर आई के निदेशक डॉ चंद्रशेखर नौटियाल ने अनुसंधान में प्रमाणित किया है कि गंगा के पानी में बीमारी पैदा करने वाली ई कोलाई बैक्टीरिया को मारने का क्षमता बरकरार है। हैजा, प्लेग, मलेरिया आदि रोगों का कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। आज भी दूसरे देश गंगाजल का इस्तेमाल करते हैं ‌। बताया जाता है कि अमेरिका में एक लीटर गंगाजल 250 डालर में मिलता है। उस नदी को पटना का नाला बना दिया गया है। पटना के सभी नालों के पानी को पुनपुन नदी के रास्ते फतुहा गंगा नदी में छोड़ दिया जाता है। फतुहा मस्ताना घाट से नोहटा, कल्याणपुर, दरियापुर, रायपुरा ,मकसूदपुर,नया टोला,खिरोधर पुर आदि सैकड़ों गांव के किनारे गंगा नदी को नाला बना दिया गया। जिस जैन को मृत्यु के पूर्व पिलाया जाता था वह जल पैर धोने लायक भी नहीं रह गया। सरकार भले ही गंगाजल को स्वच्छ बनाने के नाम पर अरबों रुपया पानी की तरह वहा आ चुकी है। पुनपुन नदी के जल से लोग खाना बनाते थे आज पुनपुन नदी का पानी इतना सड़ चुका है तथा कीड़े मकोड़े का भरमार है इसका उपयोग किसी भी काम में लाना स्वास्थ्य को खतरे में डालना है। फतुहा में पुनपुन नदी से गंगाजल को जहरीला करने का अपराधिक कृत्य माना जाता है और दंडनीय अपराध है। बताया जाता है की फतुहा के स्थानीय लोग पटना हाई कोर्ट में रिट याचिका जल्द ही किया जा सकता है।

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