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एससी -एसटी मुकदमों में सुलह का कारण अब डीएम को बताना होगा

फतुहा। एससी एसटी (अत्याचार अधिनियम) के मामलों में अब लापरवाही नहीं चलेगी यही नहीं इन मामलों में यदि आपस में शिकायतकर्ता और पीड़ित के बीच सुलह होती है तो इसकी सूचना संबंधित जिले के जिलाधिकारी को देनी होगी। यदि इस मामले में किसी के रिहाई होती है तो इसकी जानकारी जिलाधिकारी को देनी होगी। यह निर्देश निदेशक अभियोजन बिहार ने सभी जिलों के विशेष लोक अभियोजक और अन्य विशेष लोक अभियोजक को दिया है। ऐसे मामलों की सूची अप्पर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग को भेजने को कहा गया है। कहा गया है कि यदि जांचकर्ता द्वारा 60 दिनों के भीतर आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट अदालत में नहीं सुपुर्द की जाती है तो इसकी सूचना लिखित रूप से संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को देनी है।इसकी छाया एक प्रति अपर पुलिस महानिदेशक को देने का निर्देश दिया है। भागलपुर में 25 मामलों का होगा स्पीडी ट्रायल: कोसी सीमांचल और पूर्वी बिहार के जिलों में सबसे ज्यादा मामला भागलपुर में लंबित है।इन मामलों में 25 मामलों का चयन स्पीडी ट्रायल के लिए हुआ है ।दिसंबर में जारी सूची के मुताबिक 47 लोगों की रिहाई हुई है जबकि 7 लोगों की सजा हुई है ।भागलपुर के अलावा खगड़िया और सुपौल में एक हजार से ज्यादा मामले लंबित है। सबसे कम सहरसा में 180 मामले लंबित है। डॉ लक्ष्मी नारायण सिंह ने नीतीश कुमार से आग्रह किया है की एससी -एसटी एक्ट में और संशोधन करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जिस -जिस व्यक्ति पर मुकदमा है ,उनकी संपत्ति को जब्त कर पीड़ित व्यक्ति को दे देने की आवश्यकता है। इस मुकदमा में अग्रिम जमानत देने की कानून नहीं है। लंबित मामला भागलपुर में 2089, बांका में 650, अररिया 1194, जमुई 892, कटिहार 748, खगरिया 1072, किशनगंज 348, लखीसराय 465, मधेपुरा 675, मुंगेर 638, पूर्णिया, 416 सहरसा 181, सुपौल 1017 है।

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