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नुक्कड़ नाटक ‘वीर सपूतों की कुर्बानी’ की हुई प्रस्तुति 

फुलवारी शरीफ। सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच के साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक की श्रृंखला में महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं निर्देशित “वीर सपूतों की कुर्बानी” की प्रस्तुति वाल्मी में की गई।नाटक की शुरुआत सौरभ राज के स्वरबद्ध गीत- वतन की हिफाजत के लिए यारों लहू का कतरा-कतरा बहा देंगे, ना छोड़े थे ना छोड़े हैं ना छोडेंगे वसूल अपने, वतन की सरहद से दुश्मनों को मिटा देंगें… से हुई।

नाटक के माध्यम से यह दिखाया गया कि सीमा पर किस तरह से हमारे पड़ोसी मुल्क के आतंकवादी और उसकी सेना हमारे देश के सीमा के अंदर छिपकर कायर की तरह प्रवेश करते हैं और सैन्य अड्डे पर हमला करते हैं। अचानक हुए इस हमले में कई सैनिक शहीद हो जाते हैं। उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेट कर उनके पैतृक गांव आता है और राइफल से सलामी के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाता है। मां अपने इकलौते बेटे के लिए कलेजे पर पत्थर रखकर बेटे की कुर्बानी पर नाज़ करती है और शहीद सैनिक के बच्चे श्मशान घाट में शपथ लेते हैं कि एक दिन मैं भी अपने पिता के दुश्मन से बदला लूंगा। शहीद की बूढी़ मां अपने देश के नौजवानों से यह कहती है कि अनेक महापुरुषों के बलिदान के बाद यह आज़ादी हमें मिली है, इसीलिए हम सभी को आपसी एकता और अखंडता को हर हाल में बनाए रखना है। हम सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई एक हैं। जब एक दुनिया, एक सूरज और एक चांद है तो इंसान को धर्म और जाति में क्यों बाटा जाता है जबकि हम सभी भारत मां की संतान हैं।

नाटक के कलाकार महेश चौधरी, सौरभ राज, करण, नमन, रंजन, वीर, सौरव पांडे, शशांक, अखिलेश और विजेंद्र थे।

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